जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का दिया संदेश, गांव-गांव यज्ञ व दीपयज्ञ आयोजित करने पर जोर…
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री परिवार तहसील संगठन की कार्यकर्ता बैठक रविवार को ग्राम देवरा में आयोजित हुई। बैठक में विश्व शांति और विश्व कल्याण की कामना से एक घंटे तक सामूहिक गायत्री मंत्र साधना की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल बचाओ, पर्यावरण बचाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचाना रहा। अतिथियों ने गुरु एवं गायत्री माता का पूजन कर दीप प्रज्वलित किया और बैठक का शुभारंभ किया।
बैठक में मुख्य अतिथि जिला सह संयोजक प्रवीण पाटीदार ने आगामी दीपावली के संदर्भ में कहा कि यह पर्व घरों की साफ-सफाई, रोशनी, आध्यात्मिकता और पारिवारिक मिलन का प्रतीक है। दीपावली का धार्मिक महत्व भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने, माता लक्ष्मी के पूजन और विवेक के प्रतीक भगवान गणेश की आराधना से जुड़ा है। पुराणों में दीप पूजा और दीपदान की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में दीपावली को पटाखों तक सीमित करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और उनमें मौजूद रासायनिक तत्व वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं। आतिशबाजी से होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। इसका असर आंखों, कानों और श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक हवा के साथ-साथ पानी और मिट्टी को भी प्रभावित करते हैं।
*पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वयं बनें प्रहरी*
प्रवीण पाटीदार ने कहा कि गायत्री परिवार गांव-गांव में यज्ञ-हवन आयोजित करने और पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। ऐसे में दीपावली पर पटाखे जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना हमारी ही मुहिम के विपरीत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से स्वयं पटाखे नहीं जलाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। साथ ही पटाखों पर खर्च होने वाली राशि को बचाकर समाजहित के कार्यों में लगाने की अपील की।
*उपासना, साधना और स्वाध्याय का बताया महत्व*
डॉ. धनलाल पाटीदार ने उपासना, साधना, स्वाध्याय, अंशदान और समयदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित कार्यकर्ताओं को दीपावली पर पटाखे नहीं जलाने का संकल्प दिलाया। सुनील बुंदेला ने आगामी समय में गांव-गांव यज्ञ और दीपयज्ञ आयोजित करने की बात कही। पदम सिंह वास्केल ने रूढ़िवादी परंपराओं को छोड़कर विवेकसम्मत जीवन जीने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में बादल भालके और भुवान सिंह मुवेल ने संगीत की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर गिरधारी लाल मालवीया, सुखदेव राठौड़, डॉ. भूरेसिंह सोलंकी, अखिलेश जायसवाल, हरेसिंह मंडलोई, शंकरलाल डावेल, हंसा जायसवाल, ममता राठौड़ सहित गायत्री परिवार के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक का संचालन सुलतान वास्केल ने किया तथा आभार दशरथ मंडलोई ने माना।
