दीपक शर्मा की रिपोर्ट

भाजपा के धरने पर विधायक सेना महेश पटेल का सवाल—“धरने का दिखावा क्यों?”
दिन में अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान, बाद में धरना स्थल से भाजपा के बड़े नेता और पदाधिकारी गायब; बोलीं—सरकार आपकी है, जमीन से जुड़ा प्रस्ताव निरस्त करवाएं
जोबट:- आदिवासी किसानों की जमीन से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर जोबट में भाजपा द्वारा किए जा रहे धरना आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने भाजपा नेताओं के धरने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तो धरने का दिखावा करने के बजाय अपनी ही सरकार से जमीन बचाने के लिए ठोस कार्रवाई क्यों नहीं करवाई जा रही है। मीडिया चैनल से बातचीत में विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को शुरुआत से ही गंभीरता से उठा रही है। विधानसभा से लेकर सड़क तक आदिवासी किसानों की जमीन का मुद्दा उठाया गया है तथा सरकार और प्रशासन को संबंधित पत्रों एवं दस्तावेजों के माध्यम से जानकारी दी गई है।
“सरकार आपकी है, धरने का दिखावा क्यों?”
धरने पर बैठे भाजपा नेताओं को दो टूक जवाब देते हुए सेना महेश पटेल ने कहा—
“सरकार आपकी है, केंद्र में सरकार आपकी है, प्रदेश में सरकार आपकी है। अगर सच में आदिवासियों की जमीन को बचाने की चिंता है, तो धरने का दिखावा क्यों? केंद्र और प्रदेश सरकार से संपर्क करो और जमीन से जुड़े इस प्रस्ताव/लेटर को निरस्त करवाओ।” उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता और मंत्री सरकार का हिस्सा हैं तथा मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। ऐसे में यदि वास्तव में आदिवासी किसानों की जमीन बचाने की चिंता है तो उन्हें सरकार के स्तर पर ठोस निर्णय करवाना चाहिए। एक तरफ कांग्रेस पर आरोप, दूसरी तरफ अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना
विधायक ने कहा कि भाजपा नेता एक तरफ कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ स्वयं अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाया जा रहा जमीन का मुद्दा गलत है तो भाजपा नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर क्यों बैठे हैं? भाजपा नेताओं को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे वास्तव में कहना क्या चाहते हैं।
सभी भाजपा नेता धरना स्थल से क्यों गायब?
सेना महेश पटेल ने धरने की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिन में भाजपा नेताओं द्वारा अनिश्चितकालीन धरने की बात कही गई और बड़े स्तर पर आंदोलन का दावा किया गया, लेकिन बाद में धरना स्थल पर भाजपा के सभी नेता और पदाधिकारी नजर नहीं आए। उन्होंने सवाल किया—
“यदि आदिवासी किसानों की जमीन का मुद्दा इतना गंभीर है और अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की गई है, तो भाजपा के नेता और पदाधिकारी धरना स्थल से क्यों गायब हैं? दिन में बड़े-बड़े दावे और बाद में धरना स्थल पर गिने-चुने लोग—आखिर यह कैसा आंदोलन है?”उन्होंने कहा कि केवल भाषण, फोटो और धरने की घोषणा से आदिवासी किसानों की जमीन नहीं बचेगी। इसके लिए सरकार के स्तर पर ठोस निर्णय जरूरी है।
मंत्री नागर सिंह चौहान पर चुटकी—“शक्तिमान ही गंगाधर”
विधायक सेना महेश पटेल ने मंत्री नागर सिंह चौहान पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि एक तरफ उनके भाई धरने पर बैठे हैं और दूसरी तरफ मंत्री यह कहते हैं कि वे सरकार से बात करेंगे।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा—“एक तरफ अपने भाई को धरने पर बैठाते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं कि सरकार से बात करूंगा। यह तो वही बात हो गई—‘शक्तिमान ही गंगाधर।’”उन्होंने कहा कि यदि सरकार से बात करनी ही है तो मंत्री को सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर जमीन से जुड़े प्रस्ताव और पत्रों को निरस्त करवाने की पहल करनी चाहिए।
“आरोप-प्रत्यारोप नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए”
सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि अपनी जमीन बचाने के लिए ठोस कार्रवाई चाहिए। भाजपा नेता यदि वास्तव में आदिवासी किसानों के हित में खड़े हैं तो उन्हें आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर मुख्यमंत्री से मुलाकात करनी चाहिए और जमीन से जुड़े पत्र एवं प्रस्ताव निरस्त करवाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास इस मामले से जुड़े कई पत्र एवं दस्तावेज हैं और इन्हीं के आधार पर इस मुद्दे को लगातार विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाया जा रहा है।
“आदिवासी समाज सब देख रहा है”
विधायक ने कहा कि आदिवासी समाज सब देख रहा है कि कौन वास्तव में जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है और कौन केवल बयानबाजी कर रहा है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी किसानों की जमीन बचाने के लिए शुरुआत से संघर्ष कर रही है और आगे भी किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा विधानसभा में भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी किसानों की जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा तथा जमीन बचाने की इस लड़ाई में कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।

