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डिंडोरी में फसल विविधीकरण पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान कृषक-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन

डिंडौरी : 20 जनवरी, 2026
क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, डिंडोरी में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के मार्गदर्शन में फसल विविधीकरण एवं सतत कृषि प्रणाली विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी से प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण का प्रथम दिवस सोमवार को संपन्न हुआ, जिसमें जिले के अमरपुर विकासखंड अंतर्गत मोहगांव ग्राम पंचायत से आए किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजीयन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि वर्तमान समय में केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण है। फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं सब्जी फसलों को खेती में शामिल कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
तकनीकी सत्रों में किसानों को फसलों में कीट, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन, मृदा सुधार, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, तिलहनी एवं दलहनी फसलों की उन्नत किस्मों तथा अंतरवर्तीय फसल प्रणाली की जानकारी दी गई। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने कटाई-गहाई, बीजोपचार एवं भंडारण के दौरान आवश्यक सावधानियों पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान कृषक-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं रखीं। वैज्ञानिकों ने समस्याओं के व्यावहारिक समाधान बताते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
यह प्रशिक्षण पायलट प्रोजेक्ट अंतर्गत फसल विविधीकरण विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से डॉ. नम्रता जैन, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विभाग) रहीं। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. विकास गुप्ता ,क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, डिंडोरी की प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीषा श्याम, कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी के केंद्र प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. एल. अंबुलकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गीता सिंह सहित प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी श्रीमती आस्था प्रधान मरावी, बी.पी. कुरुल, सुनील मालवीय, दीपक मार्को, एसआरएफ प्रज्ञा पटले, प्रक्षेत्र सहायक पृथु कुमार एवं रवि अहिरवार उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में नई जानकारी मिली है। आयोजकों के अनुसार इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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