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हमीरपुर :प्रीपेड मीटरों का जमकर विरोध, मीटर उखाड़ उपखण्ड कार्यालय में रखे

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट

मौदहा हमीरपुर। बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के यहाँ पर लगाए गए इलेक्ट्रानिक मीटरों के स्थान पर स्मार्ट मीटरों को बिना उपभोक्ताओं को विश्वास में लिए प्रीपेड मीटरों में बदलने और इन मीटरों में आ रही बेतहाशा रीडिंग के विरोध में जहां पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हो रहे हैं तो वहीं कस्बे में भीम आर्मी के संदीप बाल्मीकि, सभासद रमजानी, फीरोज पठान, याकूब गड्डी सहित सैकडों महिला पुरुष उपभोक्ताओं ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को कस्बे की गोल मार्केट से मलीकुआ चौराहा होकर प्रदर्शन कर उपखण्ड कार्यालय में धरना शुरू कर दिया था। इस दौरान ऊर्जा मंत्री, उपखण्ड अधिकारी, जेई और बिजली विभाग मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाए गए थे।

वातानुकूलित केबिन में बैठकर नौकरी करने वाली सरकारी खुफिया एजेंसियां रहीं फेल

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उसी कडी में शुक्रवार को पूर्वी तरौस की ओर से सैकडों महिलाएं अपने घरों के स्मार्ट मीटर उखाड़ कर सडकों में प्रदर्शन करती दिखाई दी। भारी संख्या में महिलाओं द्वारा स्मार्ट मीटर उखाडने की सूचना मिलते ही बिजली विभाग के साथ एल. आई यू. एस. आई. यू. लोकल पुलिस सहित अन्य सरकारी एजेंसियोँ के हाथ पांव फूल गए और आनन फानन में उपखण्ड कार्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया। लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महिलाओं को उपखण्ड कार्यालय तक आसानी से जाने दिया। प्रदर्शन कारी महिलाओं द्वारा उपखण्ड कार्यालय पहुंच कर उखाडे गए मीटरों को कार्यालय प्रांगण में फेंक दिया।

कल तक उपभोक्ताओं से बचने वाले उपखण्ड अधिकारी, उपजिलाधिकारी कर्णवीर सिंह, क्षेत्राधिकारी राजकुमार पाण्डेय भी मौके की नजाकत को देखते हुए उपखण्ड कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन कारियों से घण्टों तक लम्बी बातचीत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। प्रदर्शन कारियों की मांग है कि, जब तक प्रीपेड मीटर नहीं बदले जाते तबतक बाइपास बिजली सप्लाई की जाए और पुरानी दरों पर बिल लिया जाए तथा इस अवधि में विजिलेंस द्वारा आम उपभोक्ताओं को परेशान न किया जाए।

वहीं बात बनती न देख पुलिस प्रशासन संदीप बाल्मीकि, सभासद रमजानी, याकूब गड्डी सहित अन्य प्रदर्शन कारियों को कोतवाली ले गई है।

यहाँ सबसे रोचक बात यह है कि, वातानुकूलित केबिन में बैठकर जिले की सुरक्षा की देखरेख करने वाली सभी खुफिया एजेंसियां इतनी बडी घटना को लेकर अंजान कैसे रही या यह अपनी ड्यूटी मात्र सूत्रों द्वारा कर रहे हैं। वहीं कस्बे के लोगों की माने तो अगर पुलिस ने प्रदर्शन कारियों का दमन करने की कोशिश की तो आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल गेंद सरकार और उपभोक्ताओं के बीच में है, अब कौन गेंद को पहले हिट करता है यह समय के गर्भ में छिपा हुआ है।

 

 

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