
सफलता की कहानी: रसोई घर से बदली स्कूल की तस्वीर-स्व. दशरथ पठाड़े को समर्पित प्रेरक गाथा
सामूहिक प्रयास, नवाचार और एक समर्पित शिक्षक की मेहनत से शासकीय प्राथमिक शाला मरकावाड़ा बनी मॉडल स्कूल
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के पांढुर्णा विकासखंड के अंतर्गत स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मरकावाड़ा ने यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सामूहिक प्रयास, नवाचार और समर्पण हो, तो बड़ा परिवर्तन संभव है। यह प्रेरणादायक सफलता की कहानी आज स्वर्गीय श्री दशरथ नारायण पठाडे, प्राथमिक शिक्षक, को समर्पित है, जिनके अथक प्रयासों और समर्पण ने इस विद्यालय को नई पहचान दिलाई।

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण) के अंतर्गत इस विद्यालय ने अपने रसोई घर और व्यवस्थाओं में ऐसा सकारात्मक बदलाव किया, जिसने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर बल्कि उनकी शिक्षा और नियमित उपस्थिति पर भी उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। इस परिवर्तन के पीछे स्व. श्री दशरथ पठाड़े का विशेष योगदान रहा, जो विद्यालय के विकास के लिए सदैव समर्पित रहे।
श्री दशरथ नारायण पठाड़े, कामठी कला के निवासी थे और उनकी नियुक्ति दिनांक 26.09.1998 को शासकीय प्राथमिक शाला मरकावाड़ा में हुई थी। वे पांढुर्णा विकासखंड में एक ख्याति प्राप्त शिक्षक के रूप में जाने जाते थे। शाला परिसर में किचन गार्डन और बाल वाटिका विकसित करने के लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया गया था। उनके उत्कृष्ट कार्यों के चलते उन्हें बीएलओ प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली में प्रशिक्षण हेतु भेजा गया तथा SIR में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिला कलेक्टर पांढुर्णा द्वारा सम्मानित भी किया गया। शिक्षकों के अधिकारों के लिए वे नियुक्ति दिवस से लेकर अंतिम समय तक निरंतर संघर्षरत रहे। आज दिनांक 08 अप्रैल 2026 को एक दुर्घटना में उनका आकस्मिक देहांत हो गया, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
पूर्व में साधारण स्वरूप में संचालित होने वाला यह विद्यालय आज स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है। वर्ष 2025-26 में यहां 35 छात्र अध्ययनरत हैं और 2 शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यालय के शिक्षकों के समर्पण, स्कूल प्रबंधन समिति के सहयोग तथा जनभागीदारी से यह परिवर्तन संभव हो पाया है, जिससे विद्यालय का संपूर्ण वातावरण प्रेरणादायक बन गया है। यह सब स्व. श्री पठाड़े के सतत प्रयासों और मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि आज यह विद्यालय जिले की उत्कृष्ट शालाओं में शुमार है।
प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बच्चों को प्रतिदिन ताजा, स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। रसोई घर में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे बच्चों की भोजन के प्रति रुचि बढ़ी है। इसका सीधा प्रभाव उनकी उपस्थिति पर भी पड़ा है, जो अब लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेष अवसरों पर विशेष भोजन की व्यवस्था बच्चों में अतिरिक्त उत्साह और खुशी का वातावरण बनाती है।
पहले विद्यालय का किचन शेड अव्यवस्थित स्थिति में था, किंतु स्कूल प्रबंधन समिति के सहयोग से इसे पूरी तरह सुव्यवस्थित और आकर्षक रूप दिया गया। रसोई घर की दीवारों पर सुंदर पेंटिंग और विभिन्न योजनाओं से जुड़े संदेश लिखे गए हैं, जो इसे एक प्रेरणादायक स्थान बनाते हैं और बच्चों को सकारात्मक संदेश देते हैं। इस बदलाव में भी स्व. श्री पठाड़े की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने विद्यालय को एक आदर्श स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विद्यालय में बच्चों के लिए बैठकर भोजन करने हेतु अलग कक्ष की व्यवस्था की गई है। साथ ही हाथ धोने की उचित सुविधा और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। भोजन से पूर्व बच्चों को स्वच्छता का महत्व सिखाया जाता है, जिससे उनमें अच्छे संस्कारों का विकास हो रहा है और वे स्वच्छ जीवनशैली की ओर प्रेरित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, विद्यालय में “माँ की बगिया” (किचन गार्डन) की स्थापना एक अभिनव और सराहनीय पहल के रूप में सामने आई है। वर्ष 2020 से 2026 के बीच इस बगिया में लगभग 250 किलोग्राम सब्जियों का उत्पादन किया गया, जिसका उपयोग मिड-डे मील में किया जाता है। यह पहल स्व. श्री दशरथ पठाड़े के मार्गदर्शन और मेहनत का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने बच्चों को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराईं और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया।
विद्यालय की इस उत्कृष्ट पहल को अन्य क्षेत्रों में भी सराहा गया है। “मेरा बूथ सबसे सुंदर” प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब समुदाय, शिक्षक और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तो हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है-और इस सामूहिक प्रयास के केंद्र में स्व. श्री पठाड़े जैसे समर्पित शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
अंततः, इस पूरे प्रयास का परिणाम यह रहा कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि हुई, शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत हुआ। आज स्वच्छ और व्यवस्थित रसोई घर तथा “माँ की बगिया” इस विद्यालय की पहचान और गर्व का विषय बन चुके हैं। यह सफलता की कहानी केवल एक विद्यालय की नहीं, बल्कि स्व. श्री दशरथ नारायण पठाड़े के समर्पण, संघर्ष और प्रेरणादायक जीवन की भी गाथा है, जो सदैव सभी के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।