
- सफलता_की_कहानी : समूह से जुड़कर डाली शिर्के ने लिखी आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानी
ऑनलाइन दुकान और जनरल स्टोर से कमा रहीं 20 हजार रुपये प्रतिमाह
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
यह कहानी है #पांढुर्णा जिले के बढ़चिचोली गाँव की 31 वर्षीय डाली शिर्के की, कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में अपने परिवार की देखभाल करती थीं। घर की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए उन्हें अक्सर आर्थिक तंगी और भविष्य की चिंता का सामना करना पड़ता था, लेकिन अपने साहस, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने आज आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।

डाली शिर्के के जीवन में बदलाव वर्ष 2018 में आया, जब वे गाँव के संजिता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बैंक सखी की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस भूमिका को निभाते हुए उन्होंने न केवल स्वयं को आगे बढ़ाया, बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी बैंक से ऋण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समूह की महिलाओं ने इस ऋण की सहायता से अपने-अपने छोटे व्यवसाय शुरू किए। किसी ने सैनिटरी पैड निर्माण, किसी ने जनरल स्टोर और किराना दुकान, तो किसी ने सिलाई सेंटर की शुरुआत की। इन प्रयासों से कई महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और वे धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने लगीं।
डाली शिर्के ने भी अपने समूह के माध्यम से ऋण लेकर ऑनलाइन दुकान और जनरल स्टोर की शुरुआत की, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 20,000 रुपये की आय होने लगी है। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।
डाली शिर्के की यह प्रेरणादायक यात्रा यह दर्शाती है कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो एक साधारण गृहिणी भी अपने परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।