

75 दिनों के प्रवास उपरांत सजल नेत्रों से आचार्य विनीत सागर को दी विदाई
संवाददाता मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
वीतरागी,सर्वज्ञ, हितोपदेशी सन्तों को नमन करना जैनत्व का कर्तव्य :- आचार्य विनीत सागर
कामां – सकल दिगंबर जैन समाज कामां द्वारा 75 दिनों से विजयमती त्यागी आश्रम में प्रवास रत दिगंबर आचार्य विनीत सागर महाराज व मुनि अर्पण सागर महाराज को सजल नेत्रों से विदाई दी गई तो इस अवसर पर विदाई से पूर्व धर्म सभा का आयोजन भी किया गया।
सकल जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन के अनुसार धर्म सभा में वक्ताओं ने गुरु गुणगान करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की। इस अवसर पर संजय बोलखेड़िया, संजय सर्राफ,अल्का जैन,अंजू जैन,गुजन जैन,मनीषा सर्राफ,सक्षम जैन,इंद्रा बड़जात्या ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान युग मे इतने वात्सल्यमयी व सरल सन्त मिलना अति दुर्लभ है। इस अवसर पर आचार्य विनीत सागर ने कहा कि 75 में सात और पांच दो अंक होते हैं सात का अर्थ सप्तव्यसन का त्याग व पांच का अर्थ पांच पापों अहिंसा,झूठ,चोरी,कुशील परिग्रह के त्याग की ओर इंगित करता हैं। उन्होंने कहा कि पंथवाद और सन्तवाद को छोड़कर सभी वीतरागी,सर्वज्ञ और हितोपदेशी सन्तों की सेवा अवश्य करनी चाहिए यही श्रावक का धर्म है। राग द्वेष की चक्की में पीस कर व्यक्ति का अस्तित्व समाप्त हो जाता है किंतु धर्म रूपी किली के साथ जो लग जाता है उनका अस्तित्व और व्यक्तित्व जीवन्त रहता है। उन्होंने जैन समाज कामां की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां प्रत्येक संस्कारो से ओतप्रोत है। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि मिलन और जुदाई जीवन का एक क्रम है जिसका सभी को सामना करना पड़ता है। इस अवसर पर अश्रुपूरित नेत्रों से सभी ने आचार्य संघ को विदाई दी।
*सोमवार को होगा डीग में प्रवेश* जैन समाज के कोषाध्यक्ष मयंक जैन ने बताया कि रविवार को रात्रि विश्राम सुहेरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में होगा तो सोमवार को प्रातः डीग कस्बे में अचार्य संघ का मंगल प्रवेश होगा।