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सूरत में चौंकाने वाला मामला: सब्जियां सूंघने की आदत से महिला के दिमाग तक पहुंचा फंगस 

सूरत में चौंकाने वाला मामला: सब्जियां सूंघने की आदत से महिला के दिमाग तक पहुंचा फंगस

 

 

राहुल सेन मांडव

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सूरत गुजरात न्यूज/ गुजरात के सूरत से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों की एक सामान्य आदत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। फल और सब्जियां खरीदते समय उन्हें सूंघकर ताजगी जांचने की आदत कई लोगों को होती है, लेकिन यही आदत जानलेवा साबित हो सकती है। सूरत की 27 वर्षीय एक महिला सब्जी विक्रेता को इसी वजह से खतरनाक फंगल संक्रमण हो गया, जो साइनस से होते हुए उसके दिमाग तक पहुंच गया।

 

डॉक्टरों के अनुसार, महिला को एस्परजिलस (Aspergillus) Fungus का संक्रमण हुआ था। यह संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता गया और दिमाग के पास की नस तक पहुंचकर खून के प्रवाह को प्रभावित करने लगा। समय पर पहचान नहीं होती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

 

सिरदर्द से शुरू हुई परेशानी

जानकारी के मुताबिक, महिला को लगातार सिरदर्द की शिकायत थी। शुरुआत में उसने सामान्य दवाएं लीं, लेकिन दर्द में कोई खास राहत नहीं मिली। स्थिति बिगड़ने पर वह संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक सावज के पास पहुंची।

 

डॉ. सावज ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मस्तिष्क के पास की एक नस में खून की गांठ (ब्लड क्लॉट) पाई गई। पहले इसे बैक्टीरियल संक्रमण मानकर एंटीबायोटिक दी गई। थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन दिमाग की सूजन बढ़ती गई। इसके बाद एमआरआई जांच कराई गई, जिसमें साइनस में गंभीर संक्रमण और हड्डी में क्षरण (bone erosion) का पता चला।

 

साइनस से दिमाग तक पहुंचा संक्रमण

ईएनटी विशेषज्ञों की मदद से आगे की जांच में स्पष्ट हुआ कि फंगस साइनस के जरिए दिमाग तक पहुंच चुका था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह संक्रमण तेजी से फैल सकता था और यदि समय रहते सही इलाज न मिलता तो सर्जरी की नौबत आ सकती थी। यहां तक कि जान का खतरा भी हो सकता था।

 

डॉ. सावज ने बताया कि महिला सब्जी विक्रेता है और उसे सब्जियों को बार-बार सूंघने की आदत थी। पत्तेदार सब्जियों और गोभी जैसी सब्जियों में फंगस के स्पोर (बीजाणु) मौजूद हो सकते हैं। इन्हें नजदीक से सूंघने पर ये सूक्ष्म कण नाक के रास्ते साइनस में चले जाते हैं। अगर प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो या लंबे समय तक संपर्क बना रहे तो संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

 

पत्तेदार सब्जियों में अधिक खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, पत्ता गोभी, फूल गोभी, पालक, मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियों में नमी अधिक होती है, जिससे फंगस पनपने की संभावना ज्यादा रहती है। खुले बाजारों में रखी सब्जियों पर धूल, नमी और तापमान के कारण फंगल स्पोर विकसित हो सकते हैं।

 

जब कोई व्यक्ति सब्जी को नजदीक से सूंघता है, तो ये सूक्ष्म स्पोर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अधिकतर मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन्हें नष्ट कर देती है, लेकिन कुछ मामलों में यह संक्रमण साइनस, फेफड़ों या दिमाग तक फैल सकता है।

 

एस्परजिलस फंगस क्या है?

एस्परजिलस एक प्रकार का सामान्य Fungus है, जो वातावरण में व्यापक रूप से पाया जाता है। यह मिट्टी, धूल, सड़ी-गली वनस्पतियों और नमी वाले स्थानों में मौजूद रहता है। आमतौर पर यह स्वस्थ लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।

 

संभावित लक्षण:

लगातार सिरदर्द

नाक बंद रहना

साइनस में दर्द या दबाव

बुखार

दृष्टि में बदलाव

मानसिक भ्रम (गंभीर मामलों में)

यदि संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाए, तो स्थिति जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

 

समय पर पहचान से बची जान

डॉक्टरों का कहना है कि इस मामले में समय पर सही जांच और इलाज मिलने से महिला की जान बच गई। यदि संक्रमण और फैलता, तो सर्जरी या लंबा इलाज आवश्यक हो सकता था। फिलहाल महिला का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

 

यह मामला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि छोटी-सी आदत भी बड़े स्वास्थ्य जोखिम में बदल सकती है।

 

क्या सावधानी बरतें?

विशेषज्ञों ने आम जनता को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

 

फल-सब्जियां खरीदते समय उन्हें नजदीक से सूंघने से बचें।

घर लाने के बाद सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और साफ करके उपयोग करें।

खराब या सड़ी हुई सब्जियों को तुरंत अलग कर दें।

अगर लगातार सिरदर्द या साइनस की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग विशेष सावधानी बरतें।

निष्कर्ष

सूरत की इस घटना ने एक सामान्य आदत के खतरनाक परिणाम को उजागर कर दिया है। सब्जियों को सूंघकर उनकी ताजगी जांचने की आदत कई लोगों में होती है, लेकिन यह आदत फंगल संक्रमण का कारण बन सकती है। खासकर पत्तेदार सब्जियों में फंगस का खतरा अधिक रहता है।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सावधानी ही ऐसे संक्रमण से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी में बदल सकती है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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