

कांकेर 12/दिसम्बर 2025 :- आदिवासी समाज और कांग्रेस नेता स्वर्गीय जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत के मामले में नए खुलासा सामने आया है जीवन ठाकुर के बड़े पुत्र नीरज ठाकुर और ग्राम मायना के पूर्व सरपंच शोप सिंह नेताम जिला जेल से रिहा हुए। रिहाई के बाद बड़ी संख्या में समाजजन और परिवार के लोग जेल पहुंचकर उनसे मिले। दोनों ने बाहर आते ही मीडिया के सामने जेल के भीतर हुई प्रताड़ना, अत्याचार, और अमानवीय व्यवहार से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए।
नीरज ठाकुर ने कहा कि उनके पिता जीवन ठाकुर और मामा को 12 अक्टूबर को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, और गिरफ्तारी के बाद से ही जेल प्रशासन द्वारा लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जा रही थी। नीरज के मुताबिक, उनके पिता की तबीयत जेल में बार-बार बिगड़ रही थी, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज देने के नाम पर कई बार रकम की मांग की। उन्होंने बताया कि जब भी वे डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाते थे, तो 40,000 तक की रिश्वत मांगी जाती थी। दवाइयां तक ठीक समय पर नहीं दी जाती थीं, न ही सही जांच की जाती थी। बार-बार इलाज मांगने पर डॉक्टर उनके पिता को गाली-गलौज करते थे और कह देते थे कि पहले पैसे दो, फिर इलाज होगा।
नीरज ने यह भी बताया कि जेल प्रशासन ने उन्हें और उनके पिता को अलग-अलग शेल में रखा ताकि वे आपस में मिल न सकें। उनके अनुसार, डॉक्टरों और जेलर द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। वे बताते हैं कि जब भी वे पिता के लिए दवाइयां लेकर जाते थे, तो उन्हें बाहर खड़ा कर दिया जाता था और सबसे ज्यादा गाली-गलौज की जाती थी। नीरज का आरोप है कि कुछ कैदियों का इस्तेमाल डॉक्टर अपना निजी काम करवाने के लिए करते थे, जिन लोगों को इलाज की बुनियादी जानकारी तक नहीं थी उनसे इंजेक्शन लगवाया जाता था। खाना अत्यंत बदतर होता था दाल-सब्ज़ी पानी जैसी और कई दिनों तक सिर्फ खिचड़ी दी जाती थी। पिता की तबीयत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उनके पैरों और चेहरे में सूजन आने लगी थी, पेट में दर्द रहता था और वे ठीक से टॉयलेट तक नहीं बैठ पाते थे। नीरज कहते हैं कि उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट होता था, लेकिन जेल प्रशासन ने बार-बार उनकी शिकायत को दबा दिया।
नीरज ठाकुर यह कहते हुए भावुक हो गए कि उनके पिता को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किए जा त्रासदी न हो।
जीवन ठाकुर की मौत के बाद पूरे ब