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सभी भक्तों की मुराद पूरी होती है जैसे नागाजी महाराज के दरबार में,,,,,,,,,,

सभी भक्तों की मुराद पूरी होती है जैसे नागाजी महाराज के दरबार में,,,,,,,,,,

तोमर घर की आराध्य व पोरसा के जनक श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज जी महाराज के हाथों से लगे हुए नीम के पेड़ की पत्तियों से असाध्य बीमारियां ठीक होती हैं,,,,,,,,,

नागजी पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए आते हैं ,, भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस फोर्स की पूरी व्यवस्था होती है,,,,

4 दिसंबर को पोरसा के जनक श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज का लगाया जाएगा छप्पन भोग तथा सजाया जाएगा फूल बांग्ला,,,,,

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नागजी पूर्णिमा के अवसर पर देशभर के नागा साधु भी पोरसा पधारते हैं

 

शैलेंद्र भदोरिया

पोरसा,,,,,,,,,,,, पोरसा के जनक तोमर घार क्षेत्र की परम आराध्य श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज का वार्षिक पूर्णिमा महोत्सव 4 दिसंबर 2025 दिन गुरुवार को मनाया जाएगा महोत्सव के दौरान पोरसा मैं कई जगह विशाल भंडारे आयोजित होगे,, 3 तारीख को रात को श्री नागाजी महाराज का दूध दही शक्कर घी शहद वह गंगाजल से अभिषेक विद्वान पंडित के माध्यम से किया जाएगा तथा नागजी मित्र मंडल के द्वारा मंदिर परिसर में फूल बंगला सजाया जाएगा तथा छप्पन भोग 4 तारीख को सुबह 4:00 बजे लगाया जाएगा उक्त कार्यक्रम महामंडलेश्वर महंत राम लखन दास महाराज के सानिध्य में आयोजित होगा,,,

मंदिर पर सुरक्षा व्यवस्था के रूप में समाजसेवी व नागजी भक्त मंडल के पदाधिकारी तथा पुलिस फोर्स तैनात रहेगा

 

हर भक्त की मन्नत पूरी होती है श्री नागाजी महाराज के दरबार में महामंडलेश्वर महंत राम लखन दास महाराज,,,,,,

पोरसा,,,,,,,,,,,, पोरसा के जनक श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज के दरबार में हर भक्त की मन्नत पूरी होती है महामंडलेश्वर महंत राम लखन दास महाराज,,

श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज की पूर्णिमा महोत्सव 4 दिसंबर को मनाया जाएगा नागाजी महाराज के हाथों से शहर पोरसा बसाया गया था नागाजी महाराज ने संबंत 1499 में जिंदा समाधि ली थी,, नागाजी महाराज का जन्म आज से 650 वर्ष ग्राम मटियापुरा के उपाध्याय परिवार में हुआ था,, नागजी महाराज का बचपन का नाम गोविंद था, इनकी माता जी और पिताजी का देहांत होने के कारण गोविंद का लालन पालन ननिहाल ग्राम हरिचा तहसील गोहद जिला भिंड में हुआ था, ननिहाल में नागाजी गोविंद गाय चराते थे,,एक दिन गाय चराते वक्त एक गाय खत्म हो गई थी उस गाय को नन्ही उम्र में जिंदा करने की गुहार नागजी गोविंदा ने परमपिता परमात्मा से की, और गाय जिंदा हो गई, गाय जिंदा होने के बाद नागाजी गोविंद दास जी का ध्यान दुनियादारी को छोड़कर तपस्या की ओर चला गए और अयोध्या में जाकर उन्होंने तनु तुलसीदास जी को अपना गुरु बनाया और वहां तपस्या करने के बाद गुरु की आज्ञा पाकर वह वापस अपनी जन्मभूमि पोरसा में आए, तब पोरसा में कुछ भी नहीं था, एक जगह उन्होंने अपनी धुनी रमा ली, धुनी स्थल पर लोग उनकी तपस्या स्थल पर दर्शन करने के लिए आने लगे और लोगों की मन्नतें पूरी होने लगी धीरे-धीरे करके पोरसा बाजार बनने लगा संबंत 1350 में श्री नागाजी महाराज ने 11 बीघा जमीन पर एक सरोवर का निर्माण किया इस सरोवर की पवित्र जल से कई बार यज्ञ की मालपुआ भी सेंके गए तथा कई राजा जो कोढ नामक बीमारी से ग्रसित थे उन्होंने उस सरोवर के पवित्र जल में स्नान करके अपनी असाध्य बीमारी कोढ़ बीमारी से निजात पाई थी,, उन राजा महाराजाओं ने अपनी बीमारी ठीक होने की खुशी में ताम्रपत्र लिखकर श्री नागाजी महाराज को सेकंडों बीघा जमीन दान की थी जो आज भी मौजूद है,,,, नागा जी महाराज ने एक बार दांतोंन करके दांतोंन को धरती में गाढ़ दिया जो नीम का वृक्ष बना जो आज भी मंदिर परिसर में स्थित है नागाजी महाराज ने संवत 1499 में जिंदा समाधि ली थी जिसका एक बीजक नागजी के चरणों के पास लगा हुआ है नागाजी मंदिर में एक तलघर है जहां नागाजी महाराज तपस्या किया करते थे,, वहां पर ना सर्दी लगती है ना गर्मी लगती है बाता अनुकूलित वह स्थान है, आग़हन पुर्णिमा के दिन नागाजी महाराज ने समाधि ली थी,, तब से आज सैकड़ो साल हो चुके है शहर पोरसा और पूरे तोमर घार में नागजी पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है पोरसा से बहुत से परिवारबाहर पहुंच गए हैं वह लोग वहां पर पूर्णिमा महोत्सव के समय पोरसा आकर अपने आराध्य के दर्शन करते हैं, पूर्णिमा महोत्सव पर लाखों लोगों के आने की उम्मीद है नागाजी महाराज जी एक बार दिल्ली के मुस्लिम शासक के द्वारा साधु संतों को क़ैद से छुड़ाने दिल्ली गये,, मुस्लिम शासक ने साधुओं से करिश्मा दिखाने के नाम पर कैद कर लिया गया था ,,उसके कैद की ख़बर पर नागाजी महाराज ने पोरसा से दिल्ली के लिए कूच किया और दिल्ली में जाकर उसे राजा के यहां से साधु संतों को कैद से मुक्ति दिलवाई गई मुस्लिम शासक राजा संत महात्माओं से चकिया चलवा के आटा पिसवा रहा था तब नागाजी महाराज ने वहां जाकर अपनी तपोबल से चक्कियों को सुतह ही चलाया जिसे देखकर राजा ने नागाजी की परीक्षा लेना चाहि, राजा ने एक लोहे की जंजीर सांकर को गर्म किया नगाजी महाराज ने उसे अपने तपोवल से राजा के पीछे छोड़ दिया राजा भागता हुआ गिरा अंत में राजा नागाजी महाराज के चरणों में गिरा ,,,तब वह गर्म जंजीर नागाजी महाराज ने अपनी कमर से बांध ली जो मूर्ति में साफ दिखती है,, नागाजी मंदिर में इस पूर्णिमा महोत्सव की सारी व्यवस्थाएं महामंडलेश्वर महंत राम लखन दास महाराज के सानिध्य में प्रभारी महंत शिवचरण दास , संत रामरतन दास महाराज,पुजारी संजू दास शुक्ला,, राम शंकर पाठक बाबा,, सुरेश शुक्ला, पुजारी रामदास श्रौत्रिय सहित सभी मंदिर में संत महात्मा एवं भक्तगण व्यवस्थाएं देखेंगे इस व्यवस्था में पुलिस विभाग भी अपनी सहभागिता करता है,,,

इस वार्षिक उत्सव में कानपुर लखनऊ इटावा कासगंज ग्वालियर भोपाल दिल्ली कोलकाता मुंबई इंदौर उज्जैन जयपुर धौलपुर मुरैना भिंड आदि पूरे भारतवर्ष के भक्तगण पोरसा आकर अपने आराध्या के दर्शन करते हैं और मन्नत की अर्जी लगाते हैं,,,,

असाध्य बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज के हाथों से लगाए हुए नीम के वृक्ष के पत्तों का उपयोग करने से,,,,,,,,

पोरसा,,,,,,,,,,,,, संबत 1350 की आसपास पोरसा के जनक श्री श्री 1008 श्री नागाजी महाराज के कर कमलों से लगाया गया नीम का वृक्ष आज श्री नागाजी मंदिर परिसर में स्थित है श्रीनागाजी महाराज ने सुबह दातुन करके दातुन की लकड़ी धरती में गाढ़ दी थी वह नीम का वृक्ष बन चुका था इसकी पत्तियों का उपयोग करने से असाध्य से असाध्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, शमशाबाद, कानपुर आदि शहरों के लोग आज भी इस पवित्र नीम की पत्तियों का उपयोग करके अपनी बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं श्री नागाजी महाराज के हाथों से शहर पोरसा बसा था जो दूध और घी की मंडी के रूप में ख्याति प्राप्त है पोरसा से सरसों कोलकाता इंदौर कानपुर आदि शहरों में जाती है कोलकाता में पोरसा को बहुत बड़ा शहर समझा जाता है यहां का घी भी पूरे भारतवर्ष में विख्यात है मगर भारत सरकार ने इस क्षेत्र को और विकसित करने के लिए अभी तक रेलवे लाइन नहीं बिछाई है जो विचारणीय विषय है अगर यहां पर रेलवे लाइन होती तो कई हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होता और बड़े-बड़े महानगरों से पोरसा शहर जुड़ जाता

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