

महाराष्ट्र क़े सैकड़ों भक्तों का दर्शनार्थ कामवन धाम आगमन हुआ
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
राजस्थान कामां – महाराष्ट्र क़े सैकड़ों भक्तों का दर्शनार्थ कामवन आगमन हुआ। सभी ने मुख्य मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन कर मोक्ष की कामना की। तीर्थराज विमलकुण्ड पर दीप प्रज्जवलित कर मनौती मानी। मन्दिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि कामवन आने मात्र से सभी काम बन जाते हैं। तीर्थराज विमलकुण्ड में समस्त तीर्थ विद्यमान हैं एक दीपक जलाने से अनंत पुण्य फल मिलता है।
काम्यवन ब्रज के बारह वनों में से एक उत्तम वन है। काम्यवन के आस-पास के क्षेत्र में तुलसी जी की प्रचुरता के कारण इसे आदिवृन्दावन भी कहा जाता है।
विमलकुण्ड के दर्शन सौभाग्यशाली लोगों को ही मिलते हैं। जिन पर राधारानी की कृपा हो वही यहां आ पाता है। भक्ति और मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए इन कुंडों में स्नान,दर्शन व आचमन करना उत्तम फलदायी माना जाता है।
इस कुण्ड के किनारे श्रीकृष्ण की भक्ति प्राप्त करने के लिए बड़े-बड़े ऋषि-महर्षियों ने वास किया है। महर्षि दुर्वासा और पाण्डवों का निवास यहाँ प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष ब्रजमण्डल परिक्रमा-मण्डली अथवा परिक्रमा करने वाले यात्री यहाँ निवास करते हैं तथा यहीं से काम्यवन की परिक्रमा आरम्भ करते हैं।
विष्णु पुराण के अनुसार यहां के तीर्थराज विमलकुण्ड को तीर्थ की मान्यता प्राप्त है। जिनमें स्नान करने मात्र से सभी प्रकार की कामना पूरी हो जाती है।इसके दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
क्योंकि माता यशोदा,नन्दबाबा ,गोपियों व श्री कृष्ण ने इन कुंडों में स्नान किया था जिससे कृष्ण के प्रति उनके प्रेम की कामना पूरी हुई थी।
सभी चौरासी कोस यात्रियों ने श्री गोविंददेव जी, श्री गोपीनाथ जी, श्री मदनमोहन जी, श्री गोकुल चन्द्रमा जी ,श्री वृंदादेवी, श्री कामेश्वर महादेव ,श्रीकुण्ड बैठक ज़ी ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामसुर क़ी गुफा ,सेतुबंध रामेश्वर ,चौरासी खम्भा ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त जी ,पांच पांडव ,धर्मकुण्ड आदि के दर्शन किये ॥