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समाज उत्थान के लिए आध्यात्मिक विचारों की आवश्यकता

भागवत कथा के तृतीय दिवसपर पंडित हरिनारायण वैष्णवजीका प्रतिपादन

श्रीक्षेत्र शुक्रताल (अनिलकुमार पालीवालद्वारा)

भारतभूमि संस्कृती और आध्यात्मिक प्रधान पवित्र भूमि होने के कारण जननी जन्मभूमि का दर्जा हमारे देश में दिया गया है। ऐसे पवित्र देश में जन्म लेना अपने आप में सौभाग्य की बात है। इस सौभाग्य का लाभ उठाकर हम सभी को इस मातृभूमि को गौरवशाली बनाए रखने के लिए सदैव अग्रसर रहना चाहिए—ऐसा प्रतिपादन सुप्रसिद्ध कथा वाचक एवं निरूपणकार पंडित हरिनारायण वैष्णव ने यहां आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस के अवसर पर करते हुए कहा।

 

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यहां श्री शिव धाम परिसर में सकल पालीवाल महाजन समाज द्वारा आयोजित कथा महोत्सव के प्रसंग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कथा समष्टि और सृष्टि में सर्वोच्च है। यदि मनुष्य और मानवता का संगम हो जाए तो किसी के भी जीवन में केवल सात दिनों में परिवर्तन लाया जा सकता है। जीवन सुधारने के विविध उपाय बताते हुए पंडित वैष्णव ने उसमें आध्यात्म का किस प्रकार उपयोग करना चाहिए, इस पर श्रोताओं को मार्गदर्शन दिया।

 

इस अवसर पर उन्होंने ध्रुव बालक, भक्त प्रह्लाद तथा धुंदकारी की भक्ति की अद्भुत शक्ति का भी दर्शन कराया। कथा के अनुसार यदि हम अपने जीवन में परिवर्तन एवं सामाजिक विकास करना चाहते हैं तो श्रीमद्भागवत का अनुकरण करना चाहिए और उसे जीवन में उतारना चाहिए, तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है—ऐसा प्रतिपादन उन्होंने अंतिम निरूपण प्रसंग का वर्णन करते हुए किया।

 

आज के तृतीय सोपान के प्रस्तुत प्रसंग ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध और भावविभोर कर दिया। पंडित वैष्णव के मधुर सुरों से गाए गए भजनों से शिव धाम गुंजायमान हो उठा। नृसिंह भगवान अवतार कथा आज के समय में भक्तों को भक्ति की शक्ति का अद्भुत दर्शन कराती है, ऐसा भी उन्होंने कहा।

 

कथा के प्रारंभ से ही श्रोताओं की पावन उपस्थिति से माता आशापूर्णा भक्त समूह आनंदित हुआ। अंत में महाआरती के समापन से पूर्व उन्होंने श्री शिव महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी सुंदर विवेचन प्रस्तुत किया।

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