

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। भादवा बीज का त्योहार सिरवी समाज द्वारा अंचल में धूमधाम से मनाया जाता है। यह समाज की आराध्य कुलदेवी आई माता के उद्भव से जुड़ा है। 25 अगस्त सोमवार को प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी नगर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सिरवी समाज द्वारा भादवा बीज का त्योहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर शोभायात्रा निकाली जाएगी। तथा समाज की प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा।

उल्लेखनीय हैं कि आई माता विक्रम संवत् 1472 में भादवा माह के शुक्ल पक्ष की बीज को गुजरात के अम्बापुर में एक कन्या के रूप में प्रकट हुईं। इस दिन का महत्व आई माता के जन्म, उनके बिलाड़ा आगमन (विक्रम संवत् 1521) और बिलाड़ा में अखण्ड ज्योत प्रज्वलित करने (विक्रम संवत् 1525) की स्मृति के रूप में है। इस दिन सीरवी समाज के लोग बडेर (मंदिर) में एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करते हैं, शोभायात्रा निकालते हैं और महा प्रसादी ग्रहण करते हैं।

आई माता का जन्म विक्रम संवत् 1472 को भादवा माह के शुक्ल पक्ष की बीज को गुजरात के अम्बापुर में बिकाजी डाबी के आंगन में एक कन्या के रूप में हुआ था, जिन्हें जीजी बाई के नाम से जाना गया।
विक्रम संवत् 1521 की भादवी बीज के दिन ही आई माता बिलाड़ा पहुंचीं, जो उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना थी। विक्रम संवत् 1525 की भादवी बीज के दिन उन्होंने बिलाड़ा में अखंड ज्योत प्रज्वलित की थी, जो आज भी उनकी बडेरों (मंदिरों) में अखण्ड रूप से जलती है और केसर के रूप में दर्शन देती है। आई माता ने मानव मात्र के कल्याण के लिए ग्यारह आचरण नियमों का निर्धारण किया था, जिनका पालन आई पंथ समुदाय के लोग करते हैं।
भादवा बीज का महत्व और उत्सवः
यह त्योहार आई माता के अवतरण, बिलाड़ा आगमन और अखण्ड ज्योत जलाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन समाज के लोग नये परिधान पहनकर माता के रथ की शोभायात्रा निकालते हैं। और रथ में विराजमान चित्र की पूजा अर्चना की जाती हैं। उत्सव का समापन महाआरती और महाप्रसादी वितरण के साथ होता है। इस अवसर पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान भी किया जाता है।
धार्मिक और सामाजिक महत्वः यह दिन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आई पंथ के अनुयायियों के लिए अपनी कुलदेवी आई माता के प्रति गहरी आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
उक्त जानकारी सिरवी महासभा के तहसील मीडिया प्रभारी सोहन काग ने दी।