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आशा और ए.एन.एम. की सूझबूझ से बचाई गई गर्भवती महिला व बच्चों की जान

देवेंद्रनगर के अंतर्गत आने वाले उपस्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव की हाई रिस्क गर्भवती महिला व बच्चे को सुमन डेस्क के माध्यम से ब्लड बैंक पन्ना द्वारा रक्तदान कर कर बचाई गई गर्भवती महिला की जान.....

(जावेद खान पन्ना ):- मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ अभिषेक जैन द्वारा बताया गाया की मातृ मृत्यु के उच्च जोखिम को पूरी तरह से काबू करने को लेकर सरकार की हर संभव कोशिश लगातार जारी है , इसके परिणाम साल दर साल सार्थक नजर आ रहे हैं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा उच्च जोखिम गर्भावस्था को दूर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है,इसी दिशा में हर जिले में ब्लड बैंक व सुमन डेस्क जैसी सुविधाएं सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करती हैं।।
यही एक घटना बड़ागांव में देखने मिली, जहां पर एक महिला जीवन यापन हेतु पैसे कमाने के उद्देश्य से बाहर गई हुई थी , वह गर्भवती होने पर प्रसव हेतु अपने ग्रहस्थान बड़ागांव वापस आई।। रोज की तरह आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी शुक्ला द्वारा गांव के भ्रमण के लिए निकली जहां उसे पता चला कि गर्भवती महिला बाहर से गांव आई है, उसकी तुरंत सूचना ए.एन.एम. दीदी गायत्री प्रजापति को दी, सूचना मिलने के उपरांत दोनों ने गर्भवती महिला के घर जाकर देखा गया तथा जांच के लिए उपस्वास्थ्य केंद्र को कहा गया, लेकिन महिला तथा परिवार के सदस्यों द्वारा संस्था में जाने एवं संस्थागत प्रसव को मना किया गया, आशा व ए.एन.एम. ने सूझबूझ दिखाते हुए पूरे परिवार को समझाया , तथा उसे स्वास्थ्य केंद्र ले आया गया जहां डॉ.राजेंद्र प्रजापति द्वारा महिला की संपूर्ण जांच कराई गई , जांच में हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत कम होने की स्थिति में डॉ. राजेंद्र द्वारा रक्त का प्रबंध तथा सुमन डेस्क से पूजा गुप्ता द्वारा निरंतर प्रयास से महिला को रक्तदान कराया गया


जहां महिला की स्थिति सुधरने उपरांत संस्थागत प्रसव कराकर महिला ने सुरक्षित बच्ची को जन्म दिया गया।।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवेंद्रनगर के सी.बी.एम.ओ. डॉ. अभिषेक जैन ने इस कार्य की सराहना करते हुए बताया कि मातृ मृत्यु के जोखिम को घटाने के लिए हर जरूरी संभव प्रयास शासन द्वारा किया जा रहा है , किंतु खून की कमी को सभी के सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है क्योंकि इसे किसी और तरीके से तैयार नहीं किया जा सकता है, इसके लिए हर किसी का जागरूक होना बहुत जरूरी है साथ ही स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आए और मातृ मृत्यु के जोखिम को कम करने में भागीदारी बने ।।

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