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माह भर से ठंडा पड़ा है प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों का चूल्हा

प्रसव हेतु आने वाली महिलाओं को नही मिल रहा है चाय नाश्ता भोजन

राकेश सोनी/ सीधी मध्यप्रदेश

माह भर से ठंडा पड़ा है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो का चूल्हा
प्रसव हेतु आने वाली महिलाओं को नहीं मिल रहा भोजन व चाय बीएमओ ने चिकित्सा अधिकारियो को जारी किए आदेश

सीधी- सीधी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत आने वाले कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो के चूल्हे इन दिनों ठंडे पड़े हुए हैं वहां मरीज के लिए ना तो चाय बना रही है ना ही भोजन की कोई व्यवस्था है कारण की शासन द्वारा रखे गए आउटसोर्स एजेन्सी के माध्यम से रखे कर्मचारियों को 31 मार्च 2024 को उनकी सेवा से पृथक कर दिया गया है।जो की बीएमओ सिहावल द्वारा सभी पीएचसी के चिकित्सा अधिकारियों को आदेश जारी किया गया था की समित बैठक कर समूह को आदेशित करे।जो की प्रभारी अधिकारी आज तक भोजन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नही की गई है।

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जी हां बता दे की शासन स्तर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों ज्यादातर प्रसव हेतु आने वाली महिलाओं के चाय नाश्ते और भोजन के लिए संविदा तौर पर कुक एवं कुक हेल्पर की नियुक्ति की गई थी जिनसे विगत 4 वर्षों से काम लिया जा रहा था इनके द्वारा प्रसव हेतु अस्पताल में पहुंचने वाली महिलाओं को सुबह के चाय नाश्ता से लेकर भोजन परोसा जाता था लेकिन 31 मार्च 2024 से इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई है और इन्हें इनके कार्य से पृथक कर दिया गया है लेकिन महिलाओं के चाय नाश्ते और भोजन के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है जिसके कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिहावल अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहरी, पोखरा, नकझर, अमरपुर, अमिलिया एवं बिठौली में आने वाली महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि विगत मन भर से इस तरफ किसी वरिष्ठ अधिकारी का ध्यान ही नहीं गया एक ओर जहां अस्पताल के मरीज चाय नाश्ते और भोजन के लिए परेशान है वहीं दूजी ओर विगत 4 वर्षों से अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारी भी काफी परेशान है उनका कहना है कि विगत 4 वर्षों से हम अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं हमें ना तो समय पर वेतन दिया जाता था ना ही अन्य को , इस असुविधा के बावजूद हमारे द्वारा लंबे समय तक अस्पताल में काम किया गया और अब अचानक हमें सेवा से पृथक कर दिया गया है साथ ही 5 माह का वेतन भी नहीं दिया गया है वेतन के बारे में जब अधिकारियों से बात की जाती है तो बजट का रोना रोया जाता है। ऐसे में अब इन भोजन बनाने और बांटने वाले कर्मचारियों के सामने खुद भूखो मरने की नौबत आ गई है।

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