

धार भोजशाला मंदिर में शंकराचार्य ने की पूजा, कहा- ‘न्यायालय का निर्देश सनातन की विजय’
मां वाग्देवी की पूजा कर रखी बड़ी मांग, कहा- ‘भोजशाला मंदिर में स्थापित हो ग्रेनाइट की भव्य प्रतिमा और बने गुरुकुल’
राहुल सेन मांडव
मो 9669141814
धार न्यूज। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर धार की भोजशाला मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती महाराज ने अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ भोजशाला मंदिर पहुंचकर मां सरस्वती (वाग्देवी) के दर्शन-पूजन किए और हवन कुंड में आहुतियां डालीं। इस दौरान उनके साथ पूर्व राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) पं. योगेंद्र महंत और महाराज जी के सचिव प्रिंसिपाल टोगिया सहित कई प्रबुद्ध जन मौजूद रहे। पूजन के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए शंकराचार्य जी ने न सिर्फ भोजशाला मंदिर के गौरवशाली अतीत को याद किया, बल्कि इसके भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ा विज़न भी दुनिया के सामने रखा।
राजा भोज की भोजशाला सिर्फ इमारत नहीं, ज्ञान की महास्थली
शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी ने भोजशाला मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा विश्व को शांति और सद्भाव का संदेश दिया है। राजा भोज द्वारा स्थापित यह पावन परिसर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की महान ज्ञान और साधना स्थली है। प्राचीन काल में यह स्थान बालक-बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था।
वसंत पंचमी के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “वसंत पंचमी मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर यदि माताएं-बहनें आकर पूजन करती हैं और यज्ञ में आहुति देती हैं, तो उनकी बुद्धि शुद्ध, सात्विक और विकृतियों से मुक्त होती है।”
न्यायालय का निर्देश सनातन की विजय का आधार
भोजशाला मंदिर को लेकर चल रहे कानूनी और पुरातात्विक घटनाक्रमों पर शंकराचार्य जी ने बेहद बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि माननीय न्यायालय का जो भी निर्देश आया है, वह सनातनियों की विजय का सुदृढ़ आधार है। उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर सत्य की जीत हुई, ठीक वैसे ही भोजशाला में भी साक्ष्यों के आधार पर सत्य की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा— “सनातन को कभी पराजित नहीं किया जा सकता। कुछ समय के लिए इसे परेशान अवश्य किया जा सकता है, परंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।”
स्थापित हो ग्रेनाइट की भव्य वाग्देवी प्रतिमा
भोजशाला के पुनरुद्धार को लेकर शंकराचार्य जी ने एक दूरदर्शी विज़न पेश किया और सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखीं:
ग्रेनाइट की भव्य प्रतिमा: उन्होंने मांग की कि भोजशाला में मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को सम्मानपूर्वक वापस स्थापित किया जाना चाहिए। यदि इसमें किसी वजह से देरी हो रही है, तो तत्काल यहां ग्रेनाइट की एक विशाल और अत्यंत सुंदर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाए।
आधुनिक गुरुकुल की स्थापना: इस स्थान को सर्व समाज की शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बनाया जाना चाहिए। गुरुकुल परंपराओं को पुनर्जीवित करके ही हम देश की अस्मिता, चरित्र का विकास और आज के युवाओं के सामने एक श्रेष्ठ आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं।
शंकराचार्य जी ने अंत में विश्व कल्याण की कामना करते हुए कहा कि भारत के इन पवित्र केंद्रों के पुनरुद्धार से पूरी दुनिया में एक बार फिर शांति और सद्भाव का प्रसार होगा।