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मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण बाधित पेशेवरों एवं सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

डिंडोरी।14 मार्च

न्याय तक समावेशी पहुँच को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण बाधित पेशेवरों तथा सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभकिया गया है। पाँच दिवसीय यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के सहयोग से तथा माननीय उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।यह पहल माननीय श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दूरदर्शी नेतृत्व में तथा माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई है।कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय श्री न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला, न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इंदौर द्वारा किया गया।प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति शुक्ला ने कहा कि मध्यस्थता न्याय की सबसे मानवीय और सहभागी विधाओं में से एक है, जहाँ टकराव के स्थान पर संवाद और आपसी समझ के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायवितरण प्रणाली को निरंतर विकसित होना चाहिए ताकि विवाद निवारण की व्यवस्थाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच सके। श्रवण बाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स को मध्यस्थता का प्रशिक्षण प्रदान करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र अधिक समावेशी और सुलभ बन सके।सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यस्थता का मूल आधार समझ, सहानुभूति और संवाद है। उन्होंने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यस्थता में हमेशा शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वास्तविक संवाद अक्सर धैर्य, विश्वास और संवेदनशीलता के माध्यम से विकसित होता है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रवण बाधित प्रतिभागियों को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नामित अनुभवी प्रशिक्षकों ‘श्रीमती अनुजा सक्सेना’ एवं ‘श्रीमती रीमा भंडारी’ द्वारा किया जा रहा है। चालीस घंटों के इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मध्यस्थता के दर्शन, संवाद तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ की नैतिकता तथा व्यावहारिक मध्यस्थता अभ्यासों पर संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रभावी मध्यस्थता के लिए आवश्यक कौशल जैसे सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संप्रेषण, संरचित संवाद, कॉकस तकनीक तथा सहमति आधारित समाधान को सुगम बनाने की विधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के विधिक ढाँचे से भी परिचित कराया जा रहा है, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 के अंतर्गत निहित सिद्धांतों तथा मध्यस्थों से अपेक्षित व्यावसायिक मानकों की जानकारी शामिल है।

इस पहल को आनंद सर्विस सोसायटी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है तथा श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित ने श्रवण बाधित समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करने और प्रतिभागियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस अवसर पर  अनुप कुमार त्रिपाठी, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर,  शिवराज सिंह गवली, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर,  अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा  दीपक शर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन  अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन  शिवराज सिंह गवली, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर द्वारा किया गया।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रवण बाधित पेशेवरों एवं सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिल रही है, जो अपने समुदायों में संवाद को प्रोत्साहित करने और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में सहायक बनने के लिए औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों का चयन मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से किया गया है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने के पश्चात इन प्रतिभागियों को उनके संबंधित जिलों की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पैनल में शामिल किया जाएगा तथा उन्हें विशेष रूप से उन विवादों में मध्यस्थता प्रक्रिया में सहयोग हेतु संलग्न किया जाएगा, जिनमें श्रवण-बाधित व्यक्तियों की सहभागिता हो।’

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मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की यह अभिनव पहल विवाद निवारण की व्यवस्थाओं को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इस विचार को पुनः स्थापित करती है कि सार्थक संवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि सहानुभूति, समझ और वैकल्पिक संप्रेषण के माध्यमों से भी विकसित हो सकता है।

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