
15 दिन बेमिसाल ; किसानों के सशक्तिकरण का मंच बना ऑरेंज फेस्टिवल
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
“संतरे की खुशबू, संस्कृति की झलक और किसानों का उत्साह — घोघरा फेस्टिवल यादगार बनकर हुआ संपन्न”
पांढुरना – पूर्व विधायक एवं सौसर विधानसभा के लोकप्रिय जननायक अजय रेवनाथजी चौरे के मार्गदर्शन में आयोजित 15 दिवसीय संतरा महोत्सव का भव्य, ऐतिहासिक एवं गरिमामय समापन मंगलवार को घोघरा में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह में किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणजनों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
महोत्सव का मुख्य उद्देश्य संतरा उत्पादक किसानों को उन्नत खेती, आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था तथा बिचौलियों से मुक्त होकर सीधे बाजार तक पहुंच बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। आयोजन के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को तकनीकी ज्ञान अपनाकर खेती को लाभ का साधन बनाने का मार्गदर्शन दिया।

संतरा फसल को मिली नई पहचान
माननीय अजय चौरे के सतत प्रयासों से जिला पांढुरना में संतरा फसल को ओडीओपी (One District One Product) के रूप में पहचान मिली है, जिससे क्षेत्र के किसानों को आर्थिक मजबूती की नई दिशा प्राप्त हुई है। इसके साथ ही किसानों की सुविधा के लिए “मेरा गाँव–मेरा बाजार” नामक स्थायी हाट की स्थापना की गई है, जिससे उन्हें दूरस्थ मंडियों तक जाने के अतिरिक्त खर्च से राहत मिलेगी और स्थानीय स्तर पर ही उपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा।

समापन समारोह की प्रमुख झलकियाँ
ऑरेंज फेस्टिवल के अंतर्गत 25 फरवरी को दोपहर 3 बजे से भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयोजक श्री अजय चौरे विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में श्री नरेंद्र साहू तथा विशिष्ट अतिथियों में श्री रामराव महाले, श्री कृष्णकांत ढोबले, राव साहेब (राजना), श्री भूषण केवटे एवं श्री धीरज चौधरी शामिल रहे।
किसान सम्मान एवं पैकिंग शुभारंभ
समारोह के दौरान 12 एवं 24 संतरे की आकर्षक पैकिंग का विधिवत शुभारंभ किया गया तथा एसएफपीओ (SFPO) के उत्पादों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ।
शाम 4 बजे आयोजित किसान सम्मान समारोह में स्वर्गीय रेवनाथ जी चौरे (पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन) की स्मृति में “कृषि रत्न पुरस्कार” से श्री राजकुमार कालबांडे एवं श्री पवार जी को सम्मानित किया गया। साथ ही क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने अपने उद्बोधन में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, समूह आधारित विपणन व्यवस्था मजबूत करने तथा संतरा उत्पादन को राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर शाम 6 बजे सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने सहभागिता की।
सांस्कृतिक संध्या बनी आकर्षण का केंद्र
शाम 7 बजे से आयोजित प्रदेश स्तरीय भव्य आदिवासी लोककला कार्यक्रम ने समापन समारोह को विशिष्ट सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। लोकनृत्य, लोकगीत, ढोल-मांदल एवं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक नृत्य प्रस्तुतियों ने आदिवासी जीवन-शैली, प्रकृति से जुड़ाव एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
इस सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में श्री संजय राठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। देर रात तक चले इस आयोजन ने संतरा महोत्सव के समापन को ऐतिहासिक, यादगार एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया।
किसानों के हित में सशक्त पहल
15 दिनों तक चले इस संतरा महोत्सव ने न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार और विपणन की नई संभावनाओं को रेखांकित किया, बल्कि किसानों को संगठित होकर आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी दिया। आयोजन ने पांढुरना जिले को संतरा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित किया।
