
हाल ही में शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे विवाद और शिकायतों के बाद दोषी प्राचार्य मनोज पटेल को उनके पद से हटा दिया गया है। मनोज पटेल की नियुक्ति पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं क्योंकि उनकी नियुक्ति बिना किसी इंटरव्यू के की गई थी। ऐसी कौन सी योग्यता थी कि बिना इंटरव्यू के प्राचार्य बना दिया गया मनोज पटेल को? क्या यह उनके सांठगांठ को नहीं बताता?बड़ी बात यह है कि वे सबसे जूनियर शिक्षक होने के बावजूद प्राचार्य बन गए थे, जिससे विभाग में असंतोष और विवाद की स्थिति बनी रही।
मनोज पटेल की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। बिना किसी चयन प्रक्रिया या इंटरव्यू के उन्हें प्राचार्य पद पर किस आधार पर नियुक्त किया गया, जो शिक्षा विभाग की मानकों के खिलाफ था। इस कारण कई वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों ने इस नियुक्ति को अनुचित बताया और शिकायतें दर्ज कराईं। किंतु क्यों कार्यवाही नहीं हुई थी?
प्राचार्य मनोज पटेल पर कई गंभीर आरोप हैं। उन्होंने अपने चहेते शिक्षक को मनमानी अवकाश दिए, जबकि अन्य शिक्षकों के अवकाशों को उलट-पुलट कर दिया। विशेष रूप से, उन्होंने अपने चहेते को 13 से अधिक CL अवकाश दिए, जबकि अन्य चहेते कुछ शिक्षकों के CL को ओएल OL में बदल दिया गया। वहीं दूसरी ओर OL लिए शिक्षक के OL को CL किया। इस प्रकार की मनमानी ने स्कूल के माहौल को खराब किया और शिक्षकों के बीच असंतोष फैलाया।
विभागीय कार्रवाई
शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने शिक्षकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया और जांच के बाद आरोप सत्य पाए जाने पर मनोज पटेल को हटाने का निर्णय लिया। इस कार्रवाई से विभाग में अनुशासन और नियमों के पालन की उम्मीद जगी है। मनोज पटेल को उनके मूल स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया है और उनके स्थान पर प्रदीप सेठ को नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है।
प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें
शिक्षकों और अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है। जबकि उनके हितैषियों द्वारा बेबुनियाद झूठ फैलाया जा रहा है कि पालकों में असंतोष है। पालकों का मानना है कि अब स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। साथ ही, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसी नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके।
मनोज पटेल के हटाए जाने से शिक्षा विभाग ने यह संदेश दिया है कि मनमानी और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और न्याय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया प्राचार्य प्रदीप सेठ किस प्रकार स्कूल के विकास और शिक्षकों के हितों की रक्षा करेंगे।