
पश्चिम बंगाल के पूर्व मिदनापुर से सैकड़ों भक्तों ने किये कामवन दर्शन
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
कामां – पश्चिम बंगाल के पूर्व मिदनापुर से सैकड़ों भक्तों ने किये कामवन दर्शन
सभी भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड की राधे राधे के जयकारों के साथ संकीर्तन करते हुए परिक्रमा की। कामवन विराजित मंदिरों ,कुण्डों व श्री कृष्ण की लीला व क्रीड़ास्थलियों के दर्शन किये तथा तीर्थराज की विधिवत पूजा -अर्चना की।
श्री विमल बिहारी जी मंदिर के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने कामवन व तीर्थराज विमलकुण्ड का माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि काम्यवन ब्रज के बारह वनों में से एक उत्तम वन है। काम्यवन के आस-पास के क्षेत्र में तुलसी जी की प्रचुरता के कारण इसे आदि वृन्दावन भी कहा जाता है। वृन्दा तुलसी जी का ही पर्याय है। श्रीवृन्दावन की सीमा का विस्तार दूर-दूर तक फ़ैला हुआ था, श्री गिरिराज, बरसाना, नन्दगाँव आदि स्थलियाँ श्री वृन्दावन की सीमा के अन्तर्गत ही मानी गयीं। महाभारत में वर्णित काम्यवन भी यही माना गया है, पाण्डवों ने यहाँ अज्ञातवास किया था। दुर्वासा ऋषि ने भी साठ हजार शिष्यों के साठ इसमें स्नान किया था। नन्दबाबा व यशोदा को तीर्थाटन कराने के लिये समस्त भूमंडल के तीर्थों का कामवन में आव्हान किया।
वर्तमान में यहाँ अनेक ऐसे स्थल मौजूद हैं जिससे इसे महाभारत से सम्बन्धित माना जा सकता है। पाँचों पाण्डवों की मूर्तियाँ, धर्मराज युधिष्ठिर के नाम से धर्मकूप तथा धर्मकुण्ड भी यहाँ प्रसिद्ध है। यह स्थल राजस्थान राज्य के डीग जिले के अन्तर्गत आता है। इसका वर्तमान नाम कामवन कामां है। तीर्थराज विमलकुण्ड और विमल बिहारी जी के दर्शन मात्र से सुमेरु पर्वत के समान पाप क्षणभर में नष्ट हो जाते है ।
कामवन दर्शन को आये श्रद्धालुओं ने कामवन विराजित गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथ जी ,चौरासी खम्भा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पांच पांडव ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,भामासुर की गुफा ,दाऊजी के चरण ,कठला ,मुकुट ,खिसलनी शिला ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,अशोक वाटिका ,गोकुल चन्द्रमा जी ,मदनमोहन जी सहित श्री कृष्ण की लीलास्थलियों व चिन्हों के दर्शन किये। सभी भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड की राधे राधे के जयकारों के साथ संकीर्तन करते हुए परिक्रमा की। कामवन विराजित मंदिरों ,कुण्डों व श्री कृष्ण की लीला व क्रीड़ास्थलियों के दर्शन किये तथा तीर्थराज की विधिवत पूजा -अर्चना की।
श्री विमल बिहारी जी मंदिर के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने कामवन व तीर्थराज विमलकुण्ड का माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि काम्यवन ब्रज के बारह वनों में से एक उत्तम वन है। काम्यवन के आस-पास के क्षेत्र में तुलसी जी की प्रचुरता के कारण इसे आदि वृन्दावन भी कहा जाता है। वृन्दा तुलसी जी का ही पर्याय है। श्रीवृन्दावन की सीमा का विस्तार दूर-दूर तक फ़ैला हुआ था, श्री गिरिराज, बरसाना, नन्दगाँव आदि स्थलियाँ श्री वृन्दावन की सीमा के अन्तर्गत ही मानी गयीं। महाभारत में वर्णित काम्यवन भी यही माना गया है, पाण्डवों ने यहाँ अज्ञातवास किया था। दुर्वासा ऋषि ने भी साठ हजार शिष्यों के साठ इसमें स्नान किया था। नन्दबाबा व यशोदा को तीर्थाटन कराने के लिये समस्त भूमंडल के तीर्थों का कामवन में आव्हान किया।
वर्तमान में यहाँ अनेक ऐसे स्थल मौजूद हैं जिससे इसे महाभारत से सम्बन्धित माना जा सकता है। पाँचों पाण्डवों की मूर्तियाँ, धर्मराज युधिष्ठिर के नाम से धर्मकूप तथा धर्मकुण्ड भी यहाँ प्रसिद्ध है। यह स्थल राजस्थान राज्य के डीग जिले के अन्तर्गत आता है। इसका वर्तमान नाम कामवन कामां है। तीर्थराज विमलकुण्ड और विमल बिहारी जी के दर्शन मात्र से सुमेरु पर्वत के समान पाप क्षणभर में नष्ट हो जाते है ।
कामवन दर्शन को आये श्रद्धालुओं ने कामवन विराजित गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथ जी ,चौरासी खम्भा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पांच पांडव ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,भामासुर की गुफा ,दाऊजी के चरण ,कठला ,मुकुट ,खिसलनी शिला ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,अशोक वाटिका ,गोकुल चन्द्रमा जी ,मदनमोहन जी सहित श्री कृष्ण की लीलास्थलियों व चिन्हों के दर्शन किये।
