
श्रीमद्भागवत कथा का आज हुआ समापन, भण्डारा कल
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
कामां डीग जिले के कस्वा कामां कामवन धाम स्थित तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित मदनगोपाल सिद्धबाबा मन्दिर पर सोमवार 8 सितम्बर से 14 सितम्बर तक महन्त सच्चिदानंद महाराज क़े तिरोभाव क़े उपलक्ष में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के सातवें दिन कथा व्यास रामकुमार बरसाना ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सातवें दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मा देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास पीठाधीश्वर पुष्पा बहन जोशी ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं । उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नि सुशीला के आग्रह पर अपने मित्र से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब जब भी भक्तों पर विपदा आ पड़ी है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। कथा व्यास ने कहा कि जो भी भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन तर जाता है।
कथा के दौरान अनेकों भजन प्रस्तुत किए गये। भजन व नृत्य क़े साथ कथा का समापन हुआ। कथा में महन्त मोहनदास ,राधामाधव दास ,प्राण गोविन्द व
नन्दकिशोर दास ,गोपाल दास ,राधाकृष्ण दास , ,सेवायत संजय लवानिया ,विक्रम लवानिया, सागर ,साकेत ,आशीष लवानिया ,गोपाल शास्त्री ,पिंकी शर्मा ,मीनाकुमारी ,गोपाल प्यारे ,अशोक शर्मा ,श्याम ,सर्वेश सैनी ,गोपाल सहित सैकड़ों महिलायें,पुरुष ,साधुजन व भक्तजन मौजूद रहे ॥