
*अखंड भारत न्यूज ने विरोध को लेकर सबसे पहले छापी थी खबर*
*कार्यक्रम तो बहाना है विरोध के डर से नहीं पहुंचे वानखेड़े देपालपुर*
*पटेल परिवार को मनाने में लगी कांग्रेस*
राहुल सेन मांडव मो 9669141814
देपालपुर न्यूज/ दिल्ली में विरोध के बाद जिला अध्यक्ष विपिन वानखेडे का देपालपुर कार्यक्रम संगठन ने कराया निरस्त सूत्रों से पता चला कि पारिवारिक कार्यक्रम तो एक बहाना था। संगठन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को समझ में आ गया की विपिन के लिए इंदौर जिले के गांवों की राजनीति आसान नहीं है। लेकिन राजनीतिक पारा उस समय गर्म हो गया जब संगठन बैठक को लेकर 29 तारीख को विपिन वानखेड़े देपालपुर आ रहे थे। अखबारों में विपिन के विरोध की खबरें जैसे ही प्रकाशित हुई मामला दिल्ली तक पहुंचा तो विपिन की बैठक एन वक्त पर बदल गई और अचानक इस बीच उनका पारिवारिक कार्यक्रम आ गया लेकिन सूत्रों से पता चला है। कि विरोध के डर से कांग्रेस भी डरी हुई थी। इसलिए विपिन का कार्यक्रम निरस्त कराया गया और कांग्रेस अब पटेल परिवार को मनाने में लग गई है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पटेल से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जिला अध्यक्ष की चिंगारी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। जानकारी में पता चला है। कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी राधेश्याम पटेल को इंदौर जिले का प्रभारी बनाना चाहते हैं। लेकिन पटेल ने उन्हें स्पष्ट मना कर दिया है। पटेल का कहना है कि गांव की राजनीति पद और प्रलोभन से नहीं चलती है। जमीनी हकीकत को देखना चाहिए क्षेत्रीय नेताओं से सलाह लेनी चाहिए संगठन सर्जन के तहत पार्टी ने जिला अध्यक्ष के नाम मांगे थे उनको पार्टी ने दरकिनार कर दिया।
विपिन की सांवेर में बैठक हुई फ्लॉप गिनती के कांग्रेसी इस बैठक में पहुंचे थे। जिला अध्यक्ष बनते ही पहली बार सांवेर संगठन बैठक लेने पहुंचे विपिन वानखेड़े को सांवेर में भी विरोध का सामना करना पड़ा कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बैठक को नजरअंदाज कर दिया यहां तक की विधानसभा चुनाव लड़ी रीना सेतीया भी इस बैठक से गायब रही सांवेर में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में बड़ा गड्ढा मिला था। इस प्रकार से राजनीतिक चलती रही तो कांग्रेस गांव में कैसे मजबूत होगी।
सूत्रों से पता चला है। कि मध्य प्रदेश में चार जगह के जिला अध्यक्ष को बदलने की कवायत चल रही है। जिनका कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुला विरोध किया था। यह विरोध प्रदेश कार्यालय तक नहीं दिल्ली दरबार तक पहुंचा था। जिसको लेकर पार्टी के महासचिव कैसी वेणुगोपाल ने प्रदेश के प्रभारी और सह प्रभारी को देखने के लिए बोला अब देखना होगा प्रदेश प्रभारी जिला अध्यक्ष के विरोध को लेकर पार्टी मुख्यालय पर क्या रिपोर्ट पेश करते हैं। ऐसे ही कांग्रेस में विरोध चलता रहा तो 2028 में कांग्रेस की कैसे नैया पार लगेगी यह देखना अभी बाकी है।
देश में भाजपा की लहर चल रही थी इंदौर में लोकसभा चुनाव लड़ने वाला कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं था। स्वर्गीय रामेश्वर पटेल परिवार ने कांग्रेस की लाज बचाई थी। एक नहीं तीन-तीन बार चुनाव लड़े केवल कांग्रेस का अस्तित्व बचाने के लिए स्वर्गीय रामेश्वर पटेल ने इंदौर से चुनाव लड़ा और कांग्रेस की लाज बचाई उसके बाद पार्टी ने दो बार सत्यनारायण पटेल को लोकसभा चुनाव लड़वाया केवल पार्टी की खाक बचाने के लिए पटेल परिवार को मालूम था। की चुनाव केवल पार्टी की लाज बचाने के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन पार्टी ने विधानसभा चुनाव में पटेल परिवार के साथ फिर धोखेबाजी की और देपालपुर से तैयारी कर रहे हैं। सत्यनारायण पटेल का टिकट काटकर विशाल पटेल को दे दिया लेकिन उसके बाद भी सत्यनारायण पटेल ने पांच नंबर में चुनाव लड़कर कांग्रेस के अस्तित्व को जिंदा रखा।