
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
गणेश जी से प्राप्त शिक्षाओं को जीवन में उतारें तो कार्य निर्विघ्न पूर्ण होंगे- श्री हरि चैतन्य महाप्रभु
कामां –डीग जिले के कस्वा कामा कामवन में तीर्थराज विमल कुण्ड स्थित श्री हरि कृपा आश्रम के संस्थापक एंव श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्यपुरी जी महाराज ने आज यहां श्री हरि कृपा आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि गणेश जी के मस्तिष्क पर स्थित चंद्रमा मस्तिष्क को ठंडा रखने का संदेश देता है गणेश जी का सर हाथी का है जो व्यर्थ के उलझाव व टकराव से बचने का संदेश देता है। गणेश जी की हाथी की आंखें हैं जो सामने वाले को बड़ा देखती है किसी को छोटा समझकर तिरस्कार ना करें का संदेश देती है। गणेश जी के कान सूर्पाकार है सुनी हुई सभी बातों में से मात्र सार को ही अंदर ग्रहण करने का संदेश देते है। लंबी सूंड जो प्रतिष्ठा का सूचक है अच्छे कार्य करके प्रतिष्ठा प्राप्त करने का संदेश देती है। व गणेश जी की जीभ (जो हाथी की है) का नुकीला भाग मानव की भांति बाहर नहीं होता अंदर की ओर होता है जो सिखाता है कि नुकीले, तीखे व्यंग्य वचन औरों को सुनाकर उनके आत्मसम्मान को ठेस न पहुँचाए। गणेश जी का कंठ मानव का है जो स्पष्ट बोलने का संदेश देता है। गणेश जी का एक बाहरी व खाने के अनेक अंदर के दांत, अशांति कलह-क्लेश, युद्ध की स्थिति पैदा करने वाले सत्य को ना बोलने का संदेश देता है ।
उन्होंने कहा कि चार हाथ गणेश जी के चार पुरुषार्थ के प्रतीक हैं जो मानव देह के रहते प्राप्त करने हैं परंतु धर्म के नियंत्रण में। गणेश जी का मोटा पेट शिक्षा देता है कि किसी के द्वारा बताए रहस्य को यूं ही उद्घाटित ना कर दें। इतना छोटा पेट न हो कि उसमें कोई बात पच ना सके। गणेश जी का वाहन चूहा है जो कुतर्क बुद्धि का प्रतीक है। चूहा कुतरता है, कुतर्क बुद्धि को दबाकर रखें तथा जहां से जो अच्छाई मिले उसे ग्रहण करें। गणेश जी के स्वरूप से प्राप्त शिक्षाओं का जिससे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। महाराज जी ने वैज्ञानिक ढंग से विस्तार से वर्णन किया।
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया।श्री महाराज जी द्वारा की गई भगवान गणपति की वेदोक्त पूजा व भव्य आरती में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया । भजन,कीर्तन का व भण्डारे का भी आयोजन हुआ ।