जौनपुर:
जौनपुर की केराकत विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक और पूर्व सांसद तूफानी सरोज के हालिया बयान ने प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरक्षण और मंदिरों में भागीदारी को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद अब उनके राजनीतिक सफर और परिवारवाद को लेकर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
तूफानी सरोज का विवादित बयान
केराकत विधायक तूफानी सरोज ने आरक्षण की बहस पर बोलते हुए कहा, "ये जो मोटी-मोटी जनेऊ पहने लोग हजारों साल से मंदिरों पर कब्जा किए बैठे हैं, पहले उनमें हमें हिस्सा दें, फिर आरक्षण खत्म करने की बात करें।"
उन्होंने आगे तर्क दिया कि यदि आरक्षण खत्म करना ही है, तो पहले समाज से जाति व्यवस्था को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी धोबी, पासी और चमार समाज के लोगों को पांडे, राय और मिश्रा बना दिया जाए, जिसके बाद आरक्षण स्वतः समाप्त हो जाएगा।
राजनीतिक सफर और 'आरक्षण के लाभ' पर विपक्ष के तीखे वार
विधायक के इस बयान के बाद विरोधी खेमे ने उनके राजनीतिक इतिहास को लेकर सीधा हमला बोला है। आलोचकों का कहना है कि खुद तीन बार सांसद और वर्तमान में विधायक रह चुके तूफानी सरोज जैसे नेता दशकों से सुरक्षित सीटों का राजनीतिक लाभ उठाते रहे हैं।
चुनावी रिकॉर्ड: तूफानी सरोज 1999 और 2004 में गाजीपुर की सुरक्षित सैदपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2008 के परिसीमन में जब सैदपुर सीट समाप्त हुई, तब उन्होंने मछलीशहर सुरक्षित लोकसभा सीट का रुख किया और वहां से भी संसद पहुंचे।
परिवारवाद का आरोप: 2024 के लोकसभा चुनाव में मछलीशहर सुरक्षित सीट से अपनी बेटी प्रिया सरोज को टिकट दिलवाने को लेकर भी उन पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि सुरक्षित सीटों पर एक ही परिवार का दबदबा रहने से जमीनी स्तर के अन्य अनुसूचित जाति व जनजाति (SC/ST) कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता।
"पुजारी बनने के लिए योग्यता चाहिए, राजनीति की तरह नहीं"
विधायक के मंदिरों पर कथित कब्जे वाले बयान पर धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी कड़ा ऐतराज जताया है। विरोध दर्ज कराने वालों का कहना है:
योग्यता और अध्ययन आवश्यक: पुजारी बनने की प्रक्रिया किसी राजनीतिक पद जैसी नहीं है।
इसके लिए वर्षों का धार्मिक अध्ययन, वेद-पुराणों की शिक्षा और संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक होता है। जातिगत भेदभाव का खंडन: आलोचकों के अनुसार, देश भर में ऐसे हजारों मंदिर मौजूद हैं जहां ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लोग विधिवत पूजा-अर्चना और पुरोहित का दायित्व निभा रहे हैं।
नेताओं पर तंज: विरोधियों ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राजनीति में भले ही बाहुबल, माफिया पृष्ठभूमि या केवल जाति के समीकरण साधकर कोई भी जनप्रतिनिधि बन जाए, लेकिन देवस्थानों में पुरोहित बनने के लिए योग्यता और आचरण की अनिवार्य शर्त होती है। तूफानी सरोज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक बहस छिड़ गई है और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
