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*खापरखेड़ा में ‘या हुसैन’ की गूंज के साथ दिखी कौमी एकता: इमाम हुसैन की याद में सजा अखाड़ा, हिंदू-मुस्लिम ने मिलकर पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल**वरिष्ठ राजेंद्र गोयदानी एवं सरपंच सुलभ गोयदानी रहे मुख्य अतिथि, मुश्ताक अली-इबादत अली की टीम ने संभाली कमान*

  • *खापरखेड़ा।* मुहर्रम के मुबारक मौके पर खापरखेड़ा गांव में *इमाम हुसैन की शहादत की याद* में पारंपरिक अखाड़े का भव्य आयोजन किया गया। ‘या हुसैन-या हुसैन’ की सदाओं और ढोल-ताशों की थाप पर युवाओं ने लाठी-तलवार के हैरतअंगेज करतब दिखाए। सबसे बड़ी बात – *ये शाम हिंदू-मुस्लिम एकता का पैगाम बन गई*।
  • *मुख्य अतिथियों से बढ़ा गौरव:
  • कार्यक्रम में गांव के वरिष्ठ *राजेंद्र गोयदानी* और युवा *सरपंच सुलभ गोयदानी* मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। दोनों समुदायों के वरिष्ठ-कनिष्ठ ग्रामीणों ने एक साथ बैठकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
  • *आयोजक टीम का जज्बा:
  • *मुश्ताक अली, आरिफ बेग, इबादत अली, इम्तियाज अली, एड. शादाब अली, राजू यादव* और *किशन कहार* की अगुवाई में पूरी मुस्लिम बिरादरी ने आयोजन को अनुशासित और ऐतिहासिक बना दिया। नम आंखों से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया।
  • *विशेष मेहमानों ने बढ़ाई रौनक:
  • इस मौके पर *खेमचंद डाबर, लक्ष्मी नारायण साहू, लक्ष्मी नारायण पटेल, बशारत खान, बाबर खान, अजीम खान, रफीक बाबा, मजीद खान* और *जुमान खान* बतौर विशेष मेहमान मौजूद रहे। सभी ने अखाड़े के उस्तादों के करतबों की दिल खोलकर सराहना की।
  • *वरिष्ठ राजेंद्र गोयदानी बोले:
  • “इमाम हुसैन का पैगाम सत्य और इंसानियत का है। खापरखेड़ा की पहचान यही है कि यहां ईद-दिवाली और मुहर्रम-होली सब मिलकर मनाते हैं। ये अखाड़ा हमारी साझा विरासत है।”
  • *अमन का पैगाम:
  • कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। अंत में मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ की गई। ग्रामीणों ने कहा – *“खापरखेड़ा की एकता ही हमारी असली पहचान और ताकत है।”*
  • आयोजन की सफलता पर सभी ने आयोजक मंडल *मुश्ताक अली, आरिफ बेग, इबादत अली, इम्तियाज अली, एड. शादाब अली, राजू यादव, किशन कहार* और उनकी पूरी टीम को मुबारकबाद दी।

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