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*”बेटियों के सपनों को मत रोको, शिक्षा का हर दीपक जलने दो” – पिपरिया कॉलेज की छात्राओं ने उठाई आवाज* *बंद पड़े गर्ल्स हॉस्टल को खोलने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, वीणा उइके बोलीं – ‘बेटी पढ़ेगी तभी राष्ट्र बढ़ेगा’*

पिपरिया।* शहीद भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पिपरिया की छात्राओं ने *बेटियों की शिक्षा बचाने* के लिए आवाज बुलंद की है। सोमवार को नियमित छात्राओं ने *आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, म.प्र. शासन* के नाम *एसडीएम पिपरिया* के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। एसडीएम के बैठक में व्यस्त होने के कारण ज्ञापन उनके कार्यालय में दिया गया।*कविता से रखी अपनी बात:* ज्ञापन की शुरुआत इन भावपूर्ण पंक्तियों से हुई – _”चल पड़ी हैं बेटियाँ अब, ज्ञान की राहों पर,_ _मत रोको उनके सपनों को, बंद पड़े इन द्वारों पर।_ _हॉस्टल फिर से खोल दीजिए, यही हमारी आस,_ _शिक्षित बेटी बनेगी कल, भारत की पहचान और विश्वास।”_*क्या है मांग:* छात्राओं ने बताया कि कॉलेज का *गर्ल्स हॉस्टल लंबे समय से बंद पड़ा है*। दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से आने वाली बेटियों को रोज *50-60 किमी* का सफर तय करना पड़ता है। इससे उनकी *शिक्षा, सुरक्षा और जेब* तीनों पर बुरा असर पड़ रहा है। कई छात्राओं ने आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने की नौबत आने की बात भी कही।*छात्रा वीणा उइके ने कहा:* _”बेटी पढ़ेगी तो परिवार आगे बढ़ेगा,_ _परिवार बढ़ेगा तो समाज संवर जाएगा,_ _समाज संवर जाएगा तो राष्ट्र सशक्त होगा,_ _बस शिक्षा का यह दीप निरंतर जलता रहना चाहिए।”_*एक स्वर में उठी मांग:* ज्ञापन में शासन से *बंद हॉस्टल की मरम्मत कर तुरंत शुरू करने* की मांग की गई। छात्राओं ने कहा – _”न कोई विशेष अधिकार चाहिए, न कोई अलग पहचान चाहिए,_ _बस पढ़ने का सुरक्षित अवसर मिले,_ _हमें अपना सुनहरा भविष्य गढ़ने का अधिकार चाहिए।”_*ये रहीं मौजूद:* ज्ञापन सौंपते समय *वीणा उइके, माशूम मर्सकोले, महक ठाकुर, खुशबू जाटव, सपना अहिरवार, नंदनी सिलावट* समेत बड़ी संख्या में नियमित छात्राएं मौजूद रहीं।छात्राओं को उम्मीद है कि शासन उनकी मांग पर संवेदनशीलता से विचार करेगा ताकि *किसी भी बेटी का उच्च शिक्षा का सपना अधूरा न रहे*।

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