
नपा परिषद में हंगामेदार बैठक: पानी–सफाई पर फूटा गुस्सा, पार्षदों ने प्रशासन को घेरा
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा। नगर पालिका परिषद की बैठक इस बार महज औपचारिकता नहीं रही, बल्कि शहर की बिगड़ी व्यवस्थाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। एजेंडे से ज्यादा चर्चा जमीनी हकीकत पर हुई, जहां पार्षदों ने एक-एक मुद्दे पर अधिकारियों से तीखे सवाल दागे।
जलाराम वार्ड के पार्षद यादवराव डोबले ने दिवंगत गौ-माता के लिए जेसीबी किराये पर लेने जैसी स्थिति को शर्मनाक बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। वहीं संतोषी माता वार्ड के पार्षद अशोक कोल्हे ने मूलभूत सुविधाओं की बदहाली को लेकर सीधा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि जब शहर में पानी, सफाई और रोशनी जैसी बुनियादी जरूरतें ही पूरी नहीं हो रहीं, तो बड़े-बड़े मुद्दों की चर्चा बेमानी है।

बैठक में पेयजल संकट, गंदगी, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट्स और सार्वजनिक शौचालयों की अव्यवस्था जैसे मुद्दे छाए रहे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि योजनाएं कागजों में सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका असर दिखाई नहीं देता। अशोक कोल्हे ने सवाल उठाया कि करोड़ों खर्च कर शौचालय बनाए गए, फिर भी लोग खुले में जाने को मजबूर क्यों हैं। बिरसा मुंडा बाथरूम योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसकी स्थिति पर भी जवाब मांगा।
सफाई व्यवस्था को लेकर माहौल और गरमा गया। पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका द्वारा शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन शहर की हालत बदतर बनी हुई है। “इतने संसाधन होने के बावजूद सफाई नहीं हो रही, तो फिर जनता से पैसा लेना बंद करो,” जैसी कड़ी टिप्पणियां भी बैठक में गूंजती रहीं।
लोचन खवसे ने बाजार क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा बस स्टैंड की अव्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं की कमी और कर्मचारियों के अभाव जैसे मुद्दों ने भी चर्चा का केंद्र बनाया। बताया गया कि नगर पालिका में करीब चार दर्जन कर्मचारियों की कमी से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
बैठक के दौरान कई बार तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली। पार्षदों ने साफ शब्दों में पूछा कि प्रस्ताव पारित होने के बाद उनका क्रियान्वयन कब होगा। मनोनीत पार्षद प्रशांत गयाधने ने नगर में बने कॉम्प्लेक्स की जांच की मांग कर एक और सवाल खड़ा कर दिया।
इस बैठक ने साफ कर दिया कि पांढुर्णा में बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों का धैर्य जवाब दे रहा है और अब जवाबदेही की मांग पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है।