
*राजनीतिक संरक्षण में अटका एक्शन? 14 लाख के सौंदर्यीकरण कार्य पर उठे गंभीर सवाल, अर्नव कंस्ट्रक्शन पर जांच की मांग*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा। मुख्यमंत्री अधोसंरचना शहरी विकास योजना के चतुर्थ चरण के अंतर्गत शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अब खुला असंतोष सामने आने लगा है। जयस्तंभ चौक, गुरुदेव वार्ड और टेकड़ी वार्ड में लगभग 14 से 16 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे पेवर ब्लॉक सौंदर्यीकरण कार्य पर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
गुरुवार दोपहर 22 नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय में सौंपा गया। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के नाम संयुक्त कलेक्टर नेहा सोनी को दिया गया। प्रमुख मांगकर्ताओं में जयंत घोड़े, हेमंत कुंवारे, सोपनिल धोटे, मनोहर घाटोड़े और ज्ञानेश्वर खोडे सहित अन्य वार्डवासी शामिल रहे।

*घटिया सामग्री का आरोप, काम रुकवाया*
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छिंदवाड़ा की अर्नव कंस्ट्रक्शन कंपनी को नगर पालिका द्वारा ठेका दिया गया है, लेकिन कंपनी द्वारा अत्यंत निम्न गुणवत्ता के पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे थे। नागरिकों का कहना है कि लगाए जा रहे ब्लॉकों के किनारे पहले से टूटे और कमजोर थे, जिन्हें हाथ से दबाने पर भी दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं।
स्थानीय लोगों ने मौके पर कार्य रुकवाकर नगर पालिका को सूचना दी। इसके बाद उपयंत्री विवेक बेलिया स्थल पर पहुंचे, लेकिन नागरिकों के अनुसार कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। आरोप है कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी न तो अमानक पेवर ब्लॉक हटाए गए और न ही ठेकेदार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हुई।
*मानकों की अनदेखी, लेवलिंग पर भी सवाल*
नागरिकों ने आरोप लगाया कि जमीन का लेवल तय मापदंडों के अनुरूप नहीं है। बिना उचित बेस प्रिपरेशन के सीधे पेवर ब्लॉक बिछाए जा रहे थे, जिससे भविष्य में धंसाव और टूट-फूट की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय वार्डवासियों का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर घटिया कार्य कर जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। नगर पालिका परिषद के कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी अनौपचारिक चर्चा में कार्य की गुणवत्ता पर असंतोष जताया है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री की योजना पर उठे सवाल
यह पूरा कार्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित अधोसंरचना विकास योजना के तहत किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि जिस योजना का उद्देश्य शहरों का विकास और सौंदर्यीकरण है, वही योजना अब विवाद और भ्रष्टाचार की चर्चा का विषय बन रही है।
लोगों का कहना है कि यदि गुणवत्ता की अनदेखी होती रही तो इससे सरकार की छवि प्रभावित होगी और विकास कार्यों पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।
*ठेकेदार की राजनीतिक पकड़ बनी ढाल?*
शहर में चर्चा है कि पिछले दो वर्षों से लगभग 5 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण कार्य—पुलिया, रिटर्निंग वॉल, घाट निर्माण, सड़क, नाली और सौंदर्यीकरण—इसी कंपनी को मिले हैं। कई वार्डों में कार्य अधूरे और विवादित बताए जा रहे हैं।
निविदा की शर्तों के अनुसार समय सीमा और गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि इनका पालन नहीं किया जा रहा। बावजूद इसके, न तो ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई हुई और न ही ठोस दंडात्मक कदम उठाए गए।
नगर परिषद के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि कंपनी की सत्ताधारी नेताओं से नजदीकी के कारण प्रशासनिक कार्रवाई ठंडी पड़ी हुई है। नागरिकों का कहना है कि यदि कोई अन्य ठेकेदार होता तो अब तक उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता।
*नागरिकों की मांग*
पूरे कार्य की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए
अमानक पेवर ब्लॉक तत्काल हटाए जाएं,गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,दोषी पाए जाने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए,जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
पांढुर्णा में यह मामला अब केवल एक वार्ड के सौंदर्यीकरण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक प्रभाव के प्रश्न के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।