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कामवन धाम ब्रज की दिव्यता केवल आस्था नहीं बल्कि संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म की अनूठी धरोहर

कामवन धाम ब्रज की दिव्यता केवल आस्था नहीं बल्कि संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म की अनूठी धरोहर

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन धाम में भागवत रसिक सन्त श्रद्धेय अवधेश दास महाराज सांपला अजमेर क़े पावन सानिध्य में हजारों भक्तों ने  मुख्य मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन व पूजा अर्चना की । सभी ने अपनी मनोकामना क़े लिये तीर्थराज विमल कुंड पर दीपक जलाए !
ब्रज 84 कोस यात्रा में उमड़ी आस्था, विमलकुण्ड व विमल बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालु जुटे !
कामवन सदियों से ब्रज 84 कोस यात्रा का मुख्य केंद्र माना जाता हैं। यहां के प्राचीन मंदिर, पौराणिक कुण्ड, और राधा-कृष्ण की अनगिनत स्मृतियां आज भी ब्रज संस्कृति की अनूठी पहचान को जीवित रखती हैं।
ब्रज की दिव्यता केवल आस्था नहीं बल्कि संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म की अनूठी धरोहर भी है। यात्रा के दौरान लगातार गूंजते भजन, जयकारे और हरे कृष्णा की ध्वनि ने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
हजारों भक्तों ने यहां आकर गहन शांति, आध्यात्मिक आनंद और दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया।
मुख्य मंदिर विमल बिहारी जी के सेवायत संजय लवानिया ने यात्रा में शामिल सभी भक्तों को विमलकुण्ड और विमल बिहारी मंदिर का आध्यात्मिक महात्म्य सुनाते हुए कहा कि
विमल बिहारी व विमलकुण्ड क़े दर्शन मात्र से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ऐसा अनेकों पुराणों में वर्णन है।
यह भूमि कृष्ण के बाल्यकाल की अनगिनत लीलाओं का साक्ष्य समेटे हुए है। उन्होंने बताया कि कामवन में विराजित इन दिव्य स्थलों के दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति और आनंद प्राप्त होता है।समूचे ब्रज मण्डल का दर्शन व उसकी पूजा करने के उद्देश्य से देश-विदेश से असंख्य तीर्थ यात्री यहां वर्ष भर आते रहते हैं।जिस आनन्द व शान्ति की अनुभूति कामवन में मिलती है अन्यत्र कहीं नहीं मिलती ।क़हा जाता है कि कामवन जाये ते काम बन जात है। यहां श्रीकृष्ण की सजीव व जीवन्त लीलाओं के चिन्ह हैं जो आनन्ददायक व भक्ति से परिपूर्ण हैं ।कामवन में चारों धाम विराजित हैं। सभी भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड ,मुख्य मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन कर दीप प्रज्जवलित किये।महाराज का सेवाअधिकारी विक्रम लवानिया ने उपन्ना ओढ़ाकर स्वागत किया ॥

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