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*भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और जीवन जीने की कला सिखाती है/पंडित रुपेश अग्निहोत्री* *बगड़ी में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन महा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल* *आज होगा शिव पार्वती विवाह निकलेगी भोले बाबा की बारात*

*भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और जीवन जीने की कला सिखाती है/पंडित रुपेश अग्निहोत्री*

*बगड़ी में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन महा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल*

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*आज होगा शिव पार्वती विवाह निकलेगी भोले बाबा की बारात*

राहुल सेन मांडव
मो 9669141814

बगड़ी/भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और जीवन जीने की कला सिखाती है और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान में एकाग्रता स्थापित करने का माध्यम ही भागवत है। मनुष्य जीवन में सम विषम अच्छा बुरा सुख-दुख कैसी भी परिस्थिति हो मनुष्य द्वारा ईश्वर का स्मरण ही सच्चा धर्म है भागवत कथा सुनने का अवसर उन्हीं को मिलता है, जिन पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है। भागवत कथा मृत्यु के भय को दूर करती है। जिससे मनुष्य का कल्याण हो सके।

यह प्रेरक उद्गार यहां बगड़ी के ब्रज धाम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पंडित रुपेश अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं को कहे उन्होंने शुकदेव जी के आगमन, भीष्म स्तुति, कपिल चरित्र और ध्रुव चरित्र बालक ध्रुव की अटूट श्रद्धा और संकल्प, जिससे असंभव भी संभव हो गया जैसे प्रसंगों का वर्णन किया। पंडित अग्निहोत्री ने कहा कि बड़े ही पुण्य देवी के बाद भागवत कथा के आयोजन का पुण्य लाभ मिलता है भागवत कथा के आयोजन से सात पीढ़ी तक इसका लाभ मिलता है। जिस स्थान जिस नगर गांव में यह आयोजन होता है वहां ईश्वर की कृपा होने लगती है।
पंडित श्री अग्निहोत्री ने भगवान कपिल मुनि के अवतार का वर्णन करते हुए कहा कि कपिल अवतार के माध्यम से भगवान ने संसार को सांख्य योग का दिव्य ज्ञान दिया, जिससे मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने समझाया कि जब तक मनुष्य अहंकार, क्रोध और लोभ का त्याग नहीं करता, तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।

कथा के दौरान राजा भरत के चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए पंडित रुपेश अग्निहोत्री जी ने कहा कि भरत जैसे महान तपस्वी भी एक क्षण के मोह में बंधकर अपने लक्ष्य से विचलित हो गए। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि मोह से सावधान रहना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह भक्ति मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। अंततः भरत जी ने अपने अगले जन्म में पूर्ण वैराग्य अपनाकर मोक्ष प्राप्त किया।

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