
उसेद-पिनाहट घाट पर समयावधि के 47 दिन बाद भी पांटून पुल ना बनने की वजह से लोगो को करना पड रहा दिक्कतों का सामना
15 अक्तूबर से शुरू होने वाला पांटून पुल, दो महीने देरी से 15 दिसंबर के बाद हो सकेगा शुरू
कीचड़ भरे तट, फिसलन और तेज़ बहाव के बीच स्टीमर तक पहुँचने में यात्रियों को जोखिम उठाना पड़ रहा
शैलेंद्र भदोरिया
अंबाह। पिनाहट-उसैद घाट चंबल नदी में इस बार पानी का फैलाव सामान्य से अधिक होने के कारण पांटून पुल निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। हर वर्ष की तरह इस साल भी लोक निर्माण विभाग, आगरा को 15 अक्टूबर तक पुल तैयार कर आवागमन के लिए खोल देना था। लेकिन नवंबर का तीसरा सप्ताह बीतने को है। बावजूद इसके पुल से आवागमन शुरू नहीं हो सका। पुल निर्माण में हो रही देरी से मप्र व उत्तर प्रदेश के हजारों नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर इन दिनों जब मांगलिक कार्यों और सहालग सीजन की शुरुआत हो चुकी है, तब आवागमन की बढ़ती जरूरतों के बीच लोगों को अब भी स्टीमर के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। पुल समय पर तैयार न होने के कारण ग्रामीणों को अपने दैनिक कायों जैसे खेत पर जाने, बाजार, स्कूल, अस्पताल और मजदूरी के लिए आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घाट पर नदी में चल रही स्टीमर में क्षमता से अधिक सवारी बैठने से हादसे की आशंका बनी रहती है। लोग अपनी जान जोखिम में डाल नदी पार करने को मजबूर है।
25 लंगड़ बन रहे, प्रयागराज से आएं कारीगर
पांटून पुल में लगाने के लिए लंगड़ बनाने का काम शुरू हो चुका हैं। लंगड़ बनाने के लिए प्रयागराज से कारीगर आएं हैं। पुल में 25 लंगड़ लगाएं जाएंगे। लंगड़ लगने से पुल सीधा रहेगा टेड़ा नहीं होगा।कुल 40 पीपे लगेंगे, 15 लग चुके
चंबल घाट पर पेंटून पुल तैयार करने के लिए लीकेज पीपो को ठीक करने केलिए बेल्डिंग कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है। पुल में कुल 40 पीपे लगाएं जाएंगे। जिसमें से 15 पीपों का काम पूरा हो चुका हैं। 05 लीकेज पीपो को दुरुस्त करने हेतु लोहे की चद्दर काटने एवं पीपो पर बेल्डिंग कार्य किया जा रहा है।
मप्र व उप्र के शहरों की दूरी 100 किमी घटती
पिनाहट-उसेद घाट पर हर वर्ष बनाए जाने वाले पांटून पुल सीमावर्ती अंचल के लोगों के लिए जीवन रेखा की तरह हैं। यह पुल बन जाने से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के कई कस्बों-अंबाह, पोरसा, मुरैना, ग्वालियर, बाह और पिनाहट के बीच की दूरी 100 किलोमीटर तक घट जाती है। पुल के अभाव में लोगों को अब धौलपुर या इटावा होकर 250 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब पुल चालू होता है, तो मरीज, विद्यार्थी, व्यापारी और मजदूर आसानी से दोनों राज्यों के बीच आ-जा पाते हैं।स्टीमर तक पहुंचने में लोगों को हो रही असुविधा
पिनाहट और उसे घाट पर पक्की पुल का निर्माण कर चल रहा है आने वाले दिनों में दोनों प्रदेशों के लोगों की समस्या खत्म हो जाएगी मगर वर्तमान में दोनों ही प्रदेशों के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 15 अक्टूबर को चालू होने वाला पेंटून पुल एक महीना बीत जाने के बावजूद भी देरी से नहीं बन सका है। लोगों को अभी भी जान जान जोखिम में डालकर स्टीमर द्वारा नदी पार करनी पड़ रही है। मध्य प्रदेश सीमा में गहरे पानी में लोगों को उतरना पड़ता है जिससे जलीय जीवों के हमले का खतरा बना रहता है।
हर साल दीपावली से पहले पांटून पुल शुरू हो जाता था। जिससे व्यापार में तेजी आती थी। लेकिन इस बार पुल न बनने से खरीददारों की संख्या घटकर 20 प्रतिशत रह गई है। हमारे ज्यादातर ग्राहक अंबाह और पोरसा क्षेत्र से आते हैं, जो अब लंबी दूरी के कारण नहीं पहुंच पा रहे।
धर्मसिंह केवट, व्यापारी
स्चम्बल नदी में जलस्तर बढ़ने से पांटून पुल लगाने में देर होती है, लेकिन इस बार देरी सामान्य से कहीं अधिक है। पुल तैयार हो जाने पर आगरा-दिल्ली मार्ग तक पहुँचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है, इसलिए जल्द से जल्द इसका कार्य पूरा होने की उम्मीद कर रहे है।
हिमांशु तोमर, यात्री
पांटून पुल निर्माण तकनीकी प्रक्रिया का कार्य है, इसलिए हर चरण सावधानी से किया जा रहा है। चंबल नदी का जलस्तर ज्यादा होने से कार्य देरी से शुरू हुआ। फिलहाल चंबल नदी का जलस्तर अनुकूल है, पांटून संरचना को नदी में उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई हैं। 15 दिसम्बर तक पांटून पुल से आवागमन शुरू हो सकेगा।
चंद्रसेन तिवारी, ठेकेदार उसेद-पिनाहट पांटून पुल
