

शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना सवालों का घर,संभाग के पास ही खुल
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता 9783029649
भरतपुर- भरतपुर शहर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर (जनता क्लिनिक) खोलने का निर्णय दूरदर्शिता की कमी के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। विभाग का यह कदम एक प्रकार से ‘पानी पर लकीर खींचने’ जैसा साबित हो रहा है, जहां असली जरूरत वाले क्षेत्रों को अनदेखा कर दिया गया है। विभाग ने इस योजना के तहत क्लिनिक तो खोले हैं पर जगह ऐसी चुनी गई है कि ये अपने मूल उद्देश्य पर चोट कर रही हैं।
प्राप्त जानकारी अनुसार शहर में मच्छी मोहल्ला के लिए स्वीकृत शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर को उच्च जनसंख्या घनत्व वाले मच्छी मोहल्ले में खोलने के बजाय आरबीएम अस्पताल से महज एक किलोमीटर दूर स्थित विश्वकर्मा कॉलोनी में एक किराए के भवन में खोल दिया गया है। क्षेत्र में जब संभाग का सबसे बड़ा आरबीएम अस्पताल सिर्फ 1 किलोमीटर दूर है तो मामूली इलाज के लिए मरीज शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्यों आएंगे।
प्राप्त जानकारी अनुसार विश्वकर्मा कॉलोनी में खोले गए इस क्लिनिक में मरीजों की संख्या काफी कम है। उक्त क्लिनिक अपने स्वीकृत स्थान मछली मोहल्ला में खुला होता, तो आस-पास के मोहल्लों के कारण दैनिक ओपीडी सैकड़ों तक पहुँच सकती थी, जिससे बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलता। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मछली मोहल्ला में जगह नहीं मिली थी और जगह मिलने पर क्लिनिक को शिफ्ट करा दिया जाएगा।
प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त मामले को लेकर लोगों का कहना है कि विभाग का यह कदम आवश्यकता के बजाय औपचारिकता निभाने जैसा प्रतीत होता है। उक्त शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर जरूरत के स्थान की जगह बेवजह के स्थान पर खुलेंगे तो ये महज सरकारी बिल्डिंग बनकर रह जाएंगे न कि जनता के लिए स्वास्थ्य का मंदिर। उक्त स्थिति सरकारी धन और संसाधनों के अकुशल उपयोग का ज्वलंत उदाहरण है।