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“जनता ही अपराधी, व्यवस्था निर्दोष!” — जब सड़क पर गड्ढे भी ‘बेकसूर’ और नागरिक ही ‘दोषी’ ठहराए गए

 

देश की सड़कों पर व्यवस्था का यह विडंबनापूर्ण चेहरा आम नागरिकों के सामने है —

जहां बिना हेलमेट चलने पर ₹1000, नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने पर ₹3000, और मोबाइल पर बात करने पर ₹2000 का जुर्माना तुरंत वसूला जाता है।

लेकिन वहीं टूटी सड़कों, खुले मेनहोल, अंधेरी गलियों, अवैध अतिक्रमणों और गंदगी से भरी सड़कों के लिए कोई जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता!

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अगर नागरिक गलती करे तो कानून तुरंत सक्रिय हो जाता है,

पर जब नगर निगम, प्रशासन या विभाग अपनी जिम्मेदारी से चूक जाएं, तब ‘सिस्टम’ मौन साध लेता है।

सवाल यह उठता है कि —

क्या सरकार और प्रशासन जनता पर सिर्फ ‘जुर्माना लगाने’ के लिए बने हैं,

या जनता की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए भी कुछ जिम्मेदारी उनकी बनती है?

 

कड़वी सच्चाई यही है:

नागरिक टैक्स भी देगा, दर्द भी सहेगा, हादसों में गिरेगा,

फिर भी ‘दोषी’ वही कहलाएगा —

क्योंकि हमारे सिस्टम में जनता को ‘उत्तरदायित्व’ नहीं, सिर्फ ‘जुर्माना’ दिया जाता है!

 

अब वक्त है सवाल पूछने का:

जब सड़कों पर मौत के गड्ढे हैं, जब अंधेरे में हादसे हो रहे हैं,

तो क्या यह प्रशासन की गलती नहीं?

क्या सिर्फ जनता ही अपराधी है, व्यवस्था नहीं?

 

– रिपोर्ट: आनंद किशोर

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ANAND KISHOR JAMSHEDPUR JHARKHAND

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