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अमलाई रेलवे ओवरब्रिज निर्माण: लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता, घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी

*शहडोल /धनपुरी* अमलाई रेलवे फाटक पर बन रहे महत्वाकांक्षी फ्लाई ओवर ब्रिज के निर्माण के दौरान पाइप लाइन डायवर्शन में हुई घोर लापरवाही और कथित धांधली का सीधा दुष्परिणाम क्षेत्र की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। घरों तक पानी नहीं पहुंचने से त्राहि-त्राहि मची हुई है, वहीं दूसरी ओर पानी की बर्बादी का आलम यह है कि सड़क किनारे कीचड़ और पानी का तालाब बन गया है, जैसा कि तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर जल संकट और अव्यवस्था के लिए ठेकेदार और एसईसीएल फिल्टर प्लांट के कर्मचारी-फोरमैन की मिलीभगत जिम्मेदार है। रेलवे ब्रिज निर्माण के कार्य में पेयजल सप्लाई लाइन को अस्थाई तौर पर व्यवस्थित करने में गंभीर अनियमितता बरती गई है। डायवर्शन के काम में घटिया सामग्री का उपयोग या तकनीकी नियमों की अनदेखी के चलते मुख्य पाइप लाइनों में जगह-जगह लीकेज (रिसाव) हो रहा है।
परिणामस्वरूप, जिस पानी को मेहनत और लागत से फिल्टर करके घरों तक पहुंचाना था, वह सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है, जिससे रास्ते पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई है। यह जलभराव न केवल राहगीरों और वाहनों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है, बल्कि मच्छरों के पनपने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ा रहा है।
एक तरफ जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, और दूसरी तरफ अधिकारी-कर्मचारियों की कथित उदासीनता से बहुमूल्य जल संसाधन की बर्बादी हो रही है। यह स्थिति न केवल निर्माण कार्य में हुई धांधली की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जिम्मेदार विभाग SECL फिल्टर प्लांट के कर्मचारी अपनी ड्यूटी के प्रति कितने लापरवाह हैं। जल आपूर्ति जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़ी समस्या पर तत्परता से ध्यान न देना सीधे-सीधे जनहित की उपेक्षा है।
स्थानीय प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन को इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराना चाहिए और इस लापरवाही में शामिल ठेकेदार व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि जनता को जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल की सामान्य आपूर्ति मिल सके।

 

 

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