
शहर के व्यापारियों में उस समय असंतोष फैल गया जब जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह यादव ने आदेश जारी कर दिया कि बाजार की सभी दुकानें रात 10 बजे तक बंद करनी होंगी। यह आदेश दीपावली से ठीक पहले आया है, जब व्यापारी वर्ग को सबसे ज्यादा व्यापार की आस होती है। व्यापारी समुदाय का कहना है कि वर्षभर मंदी और सुस्ती से जूझने के बाद त्यौहारी सीज़न ही वह अवसर होता है जब बाजारों में रौनक लौटती है और वे घाटे से उबरने की उम्मीद करते हैं।
व्यापारियों की पीड़ा
व्यापारियों का कहना है कि मंदी ने पहले ही कारोबार की कमर तोड़ रखी है। महंगाई और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में गिरावट से बाजार ठंडा पड़ा हुआ है। नवरात्रि और दीपावली का सीज़न ही वह समय है जब लोग खरीदारी के लिए निकलते हैं और बाजार में रौनक बढ़ती है। ऐसे समय में दुकानों के लिए रात्रि 10 बजे का समय निर्धारित करना सीधे-सीधे व्यापारियों के हितों पर चोट है।
व्यापारियों ने कहा कि लोग दिनभर व्यस्त रहते हैं और अधिकतर खरीदारी शाम व रात के समय करते हैं। ऐसे में बाजार जल्दी बंद करने से ग्राहकों की भीड़ घटेगी और व्यापारी और अधिक घाटे में चले जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने जताया विरोध
इस आदेश के खिलाफ व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल भाजपा नेता और भीलवाड़ा के निवर्तमान विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी से मिला और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। व्यापारियों ने अवस्थी से कहा कि यह आदेश उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर डालेगा और त्योहार से पहले की सबसे बड़ी सीज़न में उनकी कमाई बर्बाद हो जाएगी।
व्यापारियों ने मांग की कि दीपावली तक इस आदेश को वापस लिया जाए ताकि वे बिना किसी भय और रोक-टोक शांतिपूर्वक पूर्व की भाती व्यापार कर सकें।
अवस्थी का हस्तक्षेप
विट्ठल शंकर अवस्थी ने व्यापारियों की पीड़ा को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को हल करवाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। अवस्थी ने मौके पर ही एसपी धर्मेन्द्र सिंह यादव से फोन पर बातचीत की और स्पष्ट कहा—
“व्यापारी वर्ग समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। मंदी के इस दौर में व्यापारियों की हालत खराब है। दीपावली जैसे बड़े त्यौहार पर बाजारों को समय से पहले बंद करने का आदेश कहीं से भी उचित नहीं है।”
एसपी का जवाब
फोन पर हुई बातचीत में एसपी धर्मेन्द्र सिंह यादव ने व्यापारियों की भावनाओं को समझते हुए कहा कि वे इस आदेश पर विचार करेंगे।
हालांकि उन्होंने आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया, लेकिन आश्वस्त किया कि दीपावली सीज़न और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर प्रशासन इस विषय पर पुनर्विचार करेगा।
व्यापारियों की प्रतिक्रिया
व्यापारी वर्ग ने राहत की सांस लेते हुए उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही व्यापारियों की भावनाओं के साथ ही आमजन भावनाओं का सम्मान करेगा और दीपावली तक इस आदेश को स्थगित करेगा। व्यापारियों का कहना है कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने पर भी विचार कर सकते हैं।
यह पूरा मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। निवर्तमान विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी ने जिस तरह से तुरंत हस्तक्षेप कर व्यापारियों के समर्थन में खड़े होकर प्रशासन से बात की, उससे व्यापारी वर्ग में उनके प्रति विश्वास और भी मजबूत हुआ है।
इस घटनाक्रम से यह साफ है कि त्योहारों के समय व्यापारियों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन को संवेदनशील रहते हुए ऐसे निर्णय लेने होंगे जो जनता और व्यापारियों दोनों के लिए संतुलित हों।
