
भीलवाड़ा । 18 सितम्बर / शहर और उसके आसपास की सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और विस्थापितों को मुआवजा न मिलने के मामले में एक पत्र लिखकर भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है।
कोठारी ने सरकार को लिखे अपने पत्र में बताया कि भीलवाड़ा शहर में सभी रिक्त पड़ी राजकीय भूमियों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित किया जाए और विस्थापितों को तय समय सीमा में भूमि उपलब्ध कराई जाए ।
कोठारी ने कहा कि भीलवाड़ा एक औद्योगिक शहर है जहाँ दिन-प्रतिदिन भूमि की कीमतें बढ़ रही हैं। नगर निगम और नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकार में आने वाली सरकारी भूमियों को चिह्नित और सुरक्षित न करने के कारण स्वार्थी तत्व इन पर कब्जा कर रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय निकायों को अतिक्रमण हटाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, बल्कि कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ जाती है। इसके अलावा अतिक्रमणकारी कोर्ट में जाकर मामले को अनावश्यक रूप से लंबा भी खींचते हैं।
कोठारी ने बताया कि 2012 में चित्तौड़ रोड पर पुराने प्राइवेट बस स्टैंड को चौड़ा करते समय दो पक्षकारों को छोड़ दिया गया जबकि बाकी को दुकानें आवंटित की गईं। इसी तरह अंबेडकर कॉलोनी में रहने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों को रोड चौड़ा करने के लिए 2012 में सांवरिया बस्ती में विस्थापित किया गया था लेकिन आज तक उन्हें आवासीय पट्टे जारी नहीं किए गए हैं। नतीजतन ये परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। कोठारी ने सरकार से आग्रह किया है कि शहर की समस्त सरकारी भूमियों को चिह्नित कर उनकी चारदीवारी या तारबंदी कराई जाए। सरकार ऐसे सभी मामलों की जांच करे जहाँ लंबे समय से विस्थापितों को मुआवजा या भूमि नहीं मिली है। मुआवजे और विस्थापन के लिए समय सीमा निर्धारित की जाए ताकि पीड़ित पक्षकारों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
कोठारी का कहना है कि सरकार के इस कदम से न केवल सरकारी संपत्ति सुरक्षित होगी बल्कि जनहित में पीड़ित परिवारों को उनका हक भी मिल पाएगा।