
रिपोर्टर रामगोपाल बैरवा बांदीकुई दौसा
खबर नई दिल्ली से, 2 अगस्त 2025 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के विधि, मानवाधिकार एवं सूचना का अधिकार विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय “संवैधानिक चुनौतियाँ: परिप्रेक्ष्य और मार्ग” था। इसमें देशभर से हज़ारों अधिवक्ताओं, विधिवेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।राहुल गांधी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत का संविधान केवल एक दस्तावेज़ नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति की जीवंत नींव है। इसकी रक्षा न्यायपालिका, विधायिका और जनता के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। अधिवक्ताओं को लोकतंत्र का अंतिम प्रहरी बताते हुए उन्होंने कहा कि आज संविधान की आत्मा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर संगठित हमले हो रहे हैं। “आरएसएस और बीजेपी संविधान को बदलने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। मैं आत्मा से संविधान को आत्मसात करता हूँ और उसे बचाने की लड़ाई में कभी पीछे नहीं हटूँगा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संविधान ने सबको बराबरी और मतदान का अधिकार दिया है। आज उसी समानता को छीनने की कोशिश हो रही है। डॉ. अंबेडकर को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि आम नागरिक का वोट उसका सबसे पवित्र और बड़ा अधिकार है। कांग्रेस विधि विभाग के प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि संविधान की रक्षा केवल न्यायालयों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक विशेषकर अधिवक्ताओं की भी है। उन्होंने कहा कि जब सरकारें बहुमत के नाम पर अल्पसंख्यकों, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों पर हमला करती हैं तो अधिवक्ताओं को न्याय की आवाज़ बनना होगा। पारदर्शिता और आरटीआई कानून को कमजोर करने की कोशिशों को भी उन्होंने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।हरियाणा से एआईसीसी विधि विभाग के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल के नेतृत्व में हिसार समेत राज्यभर से सैकड़ों अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल के रूप में उपस्थित हुए जिस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने हरियाणा से बहुतायत में पहुंचे अधिवक्ताओं को देखकर खोवाल की राहुल गांधी के सामने प्रशंसा की। एडवोकेट खोवाल ने कहा कि यह सम्मेलन वकीलों की उस ऐतिहासिक भूमिका की याद दिलाता है जो उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा में सदैव निभाई है। जब सरकारें संवैधानिक संस्थाओं को दमनकारी उपकरण बना रही हैं तब अधिवक्ताओं को एकजुट होकर प्रतिरोध करना होगा। सम्मेलन में प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अनेक वरिष्ठ नेता, सांसद और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए जिन्होंने इस सम्मेलन को संबोधित किया । कार्यक्रम के दौरान संविधान की प्रस्तावना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, आरटीआई कानून, अल्पसंख्यक अधिकार, संघवाद और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक चर्चा हुई। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ जहाँ सभी प्रतिनिधि संविधान की रक्षा हेतु संकल्पबद्ध होकर लौटे।
