
गुरु पूर्णिमा पर महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती जी महाराज ने दिया आत्मिक जागृति का संदेश
संवाददाता:प्रभाकर मिश्र
हरिद्वार, 10 जुलाई — पावन गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हरिद्वार स्थित संस्था शाश्वतम् में एक भव्य सत्संग एवं प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दिव्य अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने शिष्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मिक जागृति, सेवा और साधना के पावन पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।स्वामी जी ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा, “गुरु केवल ज्ञान के स्रोत नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले सेतु होते हैं। जब तक जीवन में गुरु का प्रकाश नहीं आता, आत्मा अंधकार में ही भटकती रहती है।” उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर बल देते हुए बताया कि आज की भागदौड़ भरी और भौतिकता से ग्रसित दुनिया में एक सच्चे मार्गदर्शक की आवश्यकता और भी अधिक हो गई है।स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ गुरु की आज्ञा का पालन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यही समर्पण आत्मिक प्रगति की कुंजी है।कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और साधना से हुई, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इसके पश्चात स्वामी उमाकान्तानन्द जी महाराज ने आत्मज्ञान, सेवा एवं साधना के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। उनके प्रेरणादायक वचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं नीरज उपाध्याय,शिवकुमार मौर्या, सुरेश सिंह, मुकेश सिंह, नवनीत कंसल ,अजय सिंह,लाला भाई, हेमंत पाण्डेय,को भावविभोर कर दिया। इस आध्यात्मिक आयोजन में हरिद्वार व आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रसाद वितरण के साथ इस दिव्य आयोजन का समापन हुआ।
मुख्य आकर्षण:
स्वामी उमाकान्तानन्द सरस्वती जी का प्रेरणादायक प्रवचन
आत्मज्ञान, सेवा और साधना पर विशेष प्रकाश
सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता
संस्था शाश्वतम् द्वारा उत्कृष्ट एवं अनुशासित आयोजन
