

रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत Mob.No.9179977597
“भाजपा आदिवासी या महिला नेता पर लगा सकती है दांव”
मनावर। (जिला धार) मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया जुलाई के पहले सप्ताह में संभवतः शुरू हो सकती है। इस बार पार्टी आदिवासी या महिला नेता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप सकती है, ताकि संगठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बना रहे। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव अधिकारी बनाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि 3 जुलाई तक नाम तय किया जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए व्यापक पैमाने पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
प्रदेश संगठन में फिलहाल सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष, ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग से उपमुख्यमंत्री हैं। ऐसे में संगठन संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी आदिवासी या महिला नेता को सौंपे जाने की प्रबल संभावना है। अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व लेगा।
*प्रदेश परिषद के सदस्य करेंगे चयन*
प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए भाजपा द्वारा पहले ही जिला अध्यक्षों के साथ प्रदेश परिषद के सदस्य चुन लिए गए हैं।
मध्यप्रदेश भाजपा में अधिकांश बार प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है। केवल दो बार ही मतदान की स्थिति बनी थी। पहली बार 1990 के दशक में लखीराम अग्रवाल और कैलाश जोशी के बीच और दूसरी बार शिवराज सिंह चौहान और विक्रम वर्मा के बीच हुआ था।
*दावेदार सक्रिय*
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा स्वयं बड़े दावेदार हैं। इसके साथ पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला, बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल और पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया के साथ सांसद सुधीर गुप्ता के नाम भी इस दौड़ में बने हुए हैं।
महिला अध्यक्ष बनाए जाने की स्थिति में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, सांसद कविता पाटीदार, लता वानखेड़े के नाम चर्चाओं में हैं।
अगर भाजपा अध्यक्ष अनुसूचित जाति वर्ग से बनाती है तो भाजपा अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, विधायक प्रदीप लारिया के नाम भी चर्चा में हैं।
भाजपा द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति बनाकर हर चुनाव में आदिवासियों को सम्मान देने की बात करती है। भाजपा मध्यप्रदेश में आदिवासियों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए धार महू लोकसभा के पूर्व सांसद छतरसिंह दरबार, बैतूल से सांसद केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, खरगोन सांसद गजेन्द्र पटेल, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम पर विचार कर रही है। महिला वर्ग को भी साधने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री धार महू सांसद सावित्री ठाकुर को भी मौका दिया जा सकता है।
*पूर्व सांसद छतरसिंह दरबार की मजबूत दावेदार*
पूर्व सांसद छतरसिंह दरबार मध्य प्रदेश में काफी वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उन्होंने एमए और एलएलबी की पढ़ाई गवर्नमेंट कालेज ऑफ आर्टर्स एंड कॉमर्स और क्रिश्चियन कॉलेज इंदौर से की है।
छतर सिंह दरबार विधि और न्याय संबंधी समिति, नियम समिति और कृषि, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता ओजस्वी वक्ता हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ rss के बाल स्वयं सेवक होकर संघ कार्य में हमशा सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कर्मठ कार्यकर्ता रहकर स्कूल कालेज में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। कांग्रेस के एक छात्र राज में आदिवासियों के स्थापित नेता शिवभनुसिंह सोलंकी से लोहा लेकर शंखनाद करने वाले दरबार ने कांग्रेस के अभेद्य गढ़ में न सिर्फ सेंध लगाई बल्कि आदिवासियों समाज में संगठन के ध्वज वाहक बनकर परचम लहराया और कांग्रेस को चुनौती देकर संगठन की रीढ़ बने। आज भी आदिवासी समाज में अच्छी खासी पैठ रखते है। संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण भाव होने से निरंतर सक्रिय रहते है। सब को साथ लेकर चलने का माद्दा रखते है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रदेश की कुल 230 सीटों में से 47 सीट अजजा वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि लोकसभा में प्रदेश की कुल 29 सीट में 10 सीट अजजा आरक्षित है।
दरबार की योग्यता और कार्य करने की प्रबल संगठन क्षमता है। आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में आदिवासी नेतृत्व होने से न सिर्फ संगठन की पैठ मजबूत होगी बल्कि आदिवासी आरक्षित सीटों पर भाजपा को लाभ मिलेगा।