जौनपुर (संवाददाता मनोज कुमार):
जनपद जौनपुर की राजनीति में इन दिनों केराकत से सपा विधायक तूफानी सरोज का विवादित बयान चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। पंडित-पंडा समाज, "मोटे-मोटे जनेऊ" और मंदिरों पर कथित 500 वर्षों के कब्जे को लेकर दिए गए उनके बयान से जनपद के ब्राह्मण एवं सनातन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा जिले और खासकर जफराबाद विधानसभा क्षेत्र के तथाकथित दिग्गज सवर्ण नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी को लेकर हो रही है। रत्नाकर चौबे ने खोला मोर्चा, विधायक को सीधे दिखाया आईना
विधायक तूफानी सरोज के इस बयान के खिलाफ जनपद में रत्नाकर चौबे पूरी प्रखरता के साथ सामने आए हैं।
उन्होंने समाज के मान-सम्मान और स्वाभिमान के लिए खुलकर अपनी आवाज बुलंद की और तूफानी सरोज को सीधे आईना दिखाने का काम किया। जिले भर में उनके इस स्पष्ट और साहसिक रुख की सराहना हो रही है।
जफराबाद के दावेदारों पर उठे सवाल: क्या टिकट कटने का सता रहा है डर? एक तरफ जहां रत्नाकर चौबे मुखर नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जफराबाद विधानसभा क्षेत्र के कई प्रमुख नेताओं के मौन साधने पर सवाल खड़े हो रहे हैं:
वर्तमान विधायक व दिग्गज मौन: वर्तमान विधायक जगदीश नारायण राय की ओर से इस अपमानजनक टिप्पणी पर कोई तीखी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली।
सपा के टिकट दावेदार खामोश: जफराबाद से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी कर रहे आलोक त्रिपाठी, सुशील चंद्र दुबे, पप्पू रघुवंशी और डॉ. अवधनाथ पाल जैसे नेता इस पूरे घटनाक्रम पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं।
न तो उनका कोई फेसबुक पोस्ट सामने आया, न ही कोई प्रेस बयान या वीडियो जारी हुआ। सांसद पुत्री का खौफ: राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि तूफानी सरोज की सुपुत्री प्रिया सरोज मछलीशहर से सपा की सांसद हैं।
ऐसे में टिकट की दौड़ में लगे इन दावेदारों को डर सता रहा है कि यदि वे विधायक के खिलाफ मुंह खोलेंगे तो आगामी विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कट सकता है। जनता सवाल उठा रही है कि क्या निजी राजनीतिक करियर के आगे समाज का स्वाभिमान गौण हो गया है?
राहुल त्रिपाठी पारिवारिक शोक में, बाद में पक्ष रखने की उम्मीद
जफराबाद के प्रमुख नेता राहुल त्रिपाठी के संबंध में स्थिति अलग है। हाल ही में उनके पिता का निधन हो जाने के कारण उनका पूरा परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ है।
ऐसे कठिन समय में उनसे राजनीतिक बयानबाजी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि पारिवारिक श्राद्ध कर्म संपन्न होने के बाद राहुल त्रिपाठी सामने आकर इस मुद्दे पर तार्किक और करारा जवाब जरूर देंगे।
जफराबाद का समीकरण: 55 से 60 हजार ब्राह्मण मतदाता तय करेंगे रुख
राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार, जफराबाद विधानसभा क्षेत्र में करीब 55,000 से 60,000 ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। यह ऐसा विशाल वोट बैंक है जो किसी भी दल या प्रत्याशी की हार-जीत तय करने का माद्दा रखता है।
सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि समाज के स्वाभिमान के समय साधी गई चुप्पी नेताओं पर भारी पड़ सकती है और आगामी चुनावों में जागरूक मतदाता इस खामोशी का जवाब वोट की चोट से दे सकते हैं।
