रेवारी

मठ मंदिर परिसर में राजनीति और भंडारे के नाम पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों में रोष

 

रिपोर्टर: होशियार सिंह, कोसली (रेवाड़ी)। स्थानीय मठ धर्म स्थल एक बार फिर राजनीतिक अखाड़ा बनने और धार्मिक आयोजनों की आड़ में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में गहरी चिंता और आपत्ति जताई है।ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच कोसली श्री रामकिशन जांगड़ा व लम्बरदार विजय आजाद ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बाऊजी वीर कुमार यादव के आशीर्वाद से मठ धर्म स्थल कोसली को एक बार फिर राजनीतिक अखाड़ा बना दिया है। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और भंडारा आयोजकों के नामों पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि इनमें से एक भी व्यक्ति के पास वर्तमान में भंडारा आयोजित करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।नियमों के अनुसार, वर्तमान में यह मठ माननीय एसडीएम साहब सह-प्रशासक की देखरेख में है। इसलिए सभी धार्मिक और सामाजिक कार्य या तो सीधे प्रशासन की देखरेख में होने चाहिए, या फिर इसके लिए गठित पांच व्यक्तियों की निगरानी कमेटी की देखरेख में आयोजित होने चाहिए। लेकिन वर्तमान आयोजन में इन नियमों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों ने भंडारे की आड़ में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। आरोप है कि कुछ भ्रष्टाचारी व्यक्ति गैर-कानूनी तरीके से अपने निजी करीबियों के बारकोड का उपयोग कर रहे हैं। भंडारे के नाम पर श्रद्धालुओं से लाखों रुपये सीधे उनके निजी बैंक खातों में जमा करवाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल में ‘शक्ति सिंह’ नामक एक व्यक्ति का नाम बारकोड सहित गुप्त रूप से सामने आया है।ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि शक्ति नामक जिस व्यक्ति ने भंडारे के नाम पर अपने निजी खाते में राशि मंगवाई है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी ने अब तक अपने निजी खाते में करीब 40,000 रुपये तक की राशि अवैध रूप से प्राप्त कर ली है। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था के नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जल्द ही इस मामले की लिखित शिकायत पुलिस प्रशासन को सौंपी जाएगी।ग्रामीणों का आरोप है कि वरिष्ठ नेता जानते हुए भी इन भ्रष्टाचारियों की खुलकर मदद कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोसली गांव का मठ-मंदिर क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहद पवित्र और गहरी आस्था का केंद्र है। यहाँ किसी भी प्रकार की वोटिंग की राजनीति नहीं होनी चाहिए—चाहे वह अधिवक्ताओं की वोटिंग हो या कोई अन्य राजनीतिक गतिविधि। नेताओं और उनके समर्थकों को यह साफ चेतावनी दी गई है कि वे इस तरह की राजनीति को मठ-मंदिर परिसर से बाहर ही रखें, तो अच्छा रहेगा।

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