
रेवाड़ी-कोसली (होशियार सिंह, अखंड भारत न्यूज)।
कोसली स्थित मठ की चल एवं अचल संपत्तियों की देखरेख तथा आगामी निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए एसडीएम एवं मठ प्रशासक द्वारा 28 जुलाई 2026 को पांच सदस्यीय निगरानी समिति गठित किए जाने के बाद एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने समिति के गठन पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा निर्णय बताया है और निष्पक्ष समिति के गठन की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले 10 मार्च 2026 को गांव के लगभग 20–25 गणमान्य नागरिकों तथा वर्तमान पंचों के नामों की सूची निगरानी समिति के गठन के लिए प्रशासन को सौंपी गई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन द्वारा गठित नई समिति में उस सूची में शामिल किसी भी गणमान्य व्यक्ति अथवा वर्तमान पंच को स्थान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गठित समिति में केवल सरपंच के निकट माने जाने वाले पांच व्यक्तियों को शामिल किया गया है, जिससे समिति की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मठ परिसर में पूर्व में जेसीबी से कराई गई खुदाई के कारण मठ की प्राचीन धरोहर, पवित्रता एवं ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचा तथा इस पूरे मामले में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि इन घटनाओं से कोसली एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है और गांव में तनाव का माहौल बनता जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले भेजी गई सूची में शामिल गणमान्य व्यक्तियों एवं वर्तमान पंचों को प्रतिनिधित्व देते हुए नई एवं सर्वसम्मत निगरानी समिति का गठन किया जाए, ताकि मठ से जुड़े सभी कार्य पारदर्शी ढंग से संपन्न हों और गांव व क्षेत्र में अमन, शांति एवं आपसी विश्वास का वातावरण बना रहे।

