
*कम लागत में अधिक मुनाफा: शकरकंद की खेती से पांढुर्णा के किसान ने रच दी सफलता की मिसाल*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर पांढुर्णा श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन में जिले के किसान आधुनिक व नवाचार आधारित खेती अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
ऐसी ही एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है ग्राम खैरीपैका के प्रगतिशील कृषक श्री योगराज तुकाराम डोंगरे की, जिन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर सफेद शकरकंद की खेती कर कम लागत में शानदार मुनाफा कमाया।

*1 एकड़ में 5–6 टन उत्पादन*
श्री डोंगरे ने लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में सफेद शकरकंद की खेती की, जिसमें उन्हें 5 से 6 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। खास बात यह रही कि इस पूरी खेती में केवल 10 से 15 हजार रुपये की लागत आई, जबकि बाजार में अच्छी मांग के कारण उन्हें 1 लाख से 1.20 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ हुआ।
*कम पानी, कम खाद और कम मेहनत*
शकरकंद की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह फसल 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। साथ ही इसमें कम पानी और कम खाद की आवश्यकता होती है, जिससे लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
*जिले के किसानों में बढ़ रहा रुझान*
अब पांढुर्णा जिले के खैरीपैका, खापा और मालेगांव क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान जैविक पद्धति से शकरकंद की खेती अपना रहे हैं। यह खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक नया और मजबूत विकल्प बनती जा रही है।
*सफलता का संदेश*
श्री योगराज डोंगरे की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति, नवाचार और उचित मार्गदर्शन के साथ खेती करें तो कम लागत में भी बेहतर आमदनी संभव है।