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बिहार व झारखंड से आये सैकड़ों कृष्ण धर्मावलंबियों ने तीर्थराज विमल कुंड के आचमन ले लगाई परिक्रमा

बिहार व झारखंड से आये सैकड़ों कृष्ण धर्मावलंबियों ने तीर्थराज विमल कुंड के आचमन ले लगाई परिक्रमा

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

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जवाहर शास्त्री वृन्दावन क़े पावन सानिध्य में हजारों कृष्ण भक्तों ने की कामवन यात्रा
बिहार व झारखंड से आये सैकड़ों कृष्ण धर्मावलंबियों ने विमल बिहारी ,विमल देवी ,सिद्धबाबा सहित सभी मन्दिरों के दर्शन व पूजन कर तीर्थराज क़े आचमन व परिक्रमा की।
मन्दिर विमल बिहारी जी के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने तीर्थराज का माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि
सिंधु देश के राजा विमल जो धर्मपरायण व विष्णु भक्त थे । उनके 6000 रानियां थीं जिनसे 16 हजार 100 कन्याओं ने जन्म लिया परन्तु कोई पुत्र नहीं हुआ । ऋषि याज्ञवल्क्य ने राजा विमल को बताया कि इन सब कन्याओं का विवाह आप श्री कृष्ण से कीजिये जिन्होंने ब्रज में अवतार ले लिया है़ । राजा विमल ने अपना दूत भेजकर श्रीकृष्ण को आमन्त्रित किया तथा अपनी 16 हजार एक सौ पुत्रियों का विवाह कर अपना राज्य ,धन दौलत सर्वस्व कृष्णार्पण कर दिया । श्रीकृष्ण ने राजा विमल को स्वः स्वरूप प्रदान कर दिया तथा समस्त कन्याओं को साथ लेकर कामवन पधारे । यहां जिस स्थान पर विमलकुण्ड है़ महारास किया । 16 हजार 100 कृष्ण व 16 हजार 100 विमल कन्या । महारास में आनन्दित होकर उन विमल कन्याओं के नेत्रों से जो प्रेमाश्रु निकले उनसे विमलकुण्ड का प्राकट्य हुआ ।
यहां वर्षभर देशी -विदेशी श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं ।
धार्मिक मान्यतानुसार विमलकुण्ड के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है़ ।

तीर्थराज विमलकुण्ड करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र व कामवन धाम का हृदय माना जाता है। 5500 वर्ष पूर्व इसका प्राकट्य विमल कन्याओं के प्रेमाश्रुओ से हुआ। अनेकों पुराण इसकी गाथाओं से भरे पड़े हैं। विष्णु पुराण ,पद्म पुराण ,नारद पुराण ,आदिवाराह पुराण ,ब्रह्मवैवर्त पुराण ,महाभारत ,गर्ग संहिता आदि में इसका विस्तार से माहात्म्य वर्णित है।

सभी ने कामवन क़े प्रमुख दर्शन
तीर्थराज विमलकुण्ड ,मुख्य मन्दिर विमल बिहारी सहित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों गया कुण्ड ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामासुर की गुफा ,महाप्रभु जी की बैठक ,श्रीकुण्ड ,सेतुबन्ध रामेश्वर ,लंका-यशोदा,गया कुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पंचमुखी महादेव,पांच पांडव ,धरमकुण्ड , वृन्दादेवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथजी ,चौरासीखम्भा ,आदि के दर्शन किये।

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