
मायापुर से कृष्ण धर्मावलंबियों ने कामवन के दर्शन किये
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
कामां- कृष्ण धर्मावलंबियों ने कामवन क़े मुख्य मन्दिर विमल बिहारी के दर्शन व पूजन कर तीर्थराज क़े आचमन व परिक्रमा की।
मन्दिर विमल बिहारी जी के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने तीर्थराज का माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि गर्ग संहिता के अनुसार सिंधु देश के राजा विमल जिनके सोलह हजार एक सौ कन्यायें थी जिनका विवाह राजा विमल ने मुनि याज्ञवल्क्य की आज्ञा से भगवान श्री कृष्ण से किया। श्रीकृष्ण को राजा ने समस्त राज ,धन दौलत ,खजाना तथा स्वयम को भी कृष्णार्पण कर दिया। भगवान प्रसन्न हो गये तथा राजा विमल को सारुप्य देकर छः हजार रानियों सहित गोलोक धाम भेज दिया। समस्त कन्याओं को साथ लेकर कामवन पधारे तथा यहां वन की सुंदरता को देखकर महारास किया सोलह हजार एक सौ कृष्ण व उतनी ही राजा विमल की कन्याएं। महारास में आनंदित होकर उन कन्याओं के नेत्रों से जो प्रेम से अश्रु निकलकर इस धरा पर गिरे उनसे विमल कुण्ड का प्राकट्य हुआ।
कामवन दर्शन को आये श्रद्धालुओं ने कामवन विराजित वृंदा देवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथ जी ,चौरासी खम्भा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पांच पांडव ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,भामासुर की गुफा ,दाऊजी के चरण ,कठला ,मुकुट ,खिसलनी शिला ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,अशोक वाटिका ,गोकुल चन्द्रमा जी ,मदनमोहन जी सहित श्री कृष्ण की लीलास्थलियों व चिन्हों के दर्शन किये।