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बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड वाहन बदस्तूर जारी अवैध परिवहन

नंबर प्लेट तक गायब

 

महेश अग्रहरी संवादाता

 

ओबरा।
थमने के बजाए बदस्तूर जारी है।
बताते चलें कि ओबरा सी तापीय परियोजना के निर्माण कार्य में आने वाले अवैध बालू लदे वाहनो में निर्धारित मानक से अधिक बालू लादकर परिवहन किया जा रहा है। इतना ही नहीं ओवरलोड वाहनों में कई वाहनों के नंबर प्लेट तक भी गायब हैं। जिसमें अंदेशा जताया जा रहा है कि बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से अवैध बालू का परिवहन भी किया जा रहा है। बता दे की कुछ महीने पूर्व बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड वाहनों से बालू परिवहन की शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंची ओबरा पुलिस और वन विभाग की टीम ने ओबरा सी तापीय परियोजना में बालू लादकर जा रहे वाहनों की जांच शुरु कर दी थी। जिससे वहां भगदड़ मचने के साथ ही जांच शुरु होने की खबर मिलते ही कई वाहन चालक अपने वाहनों को जहां तहां छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए थे। ऐसे में पुलिस ने कई घंटे तक जांच के दौरान कुछ वाहनों को पकड़कर ओबरा कोतवाली भी ले आई थी। एक बार पुनः ओबरा सी तापीय परियोजना में ओवरलोड बालू लदे वाहनों का संचालन लगातार जारी है। जिससे प्रशासन की ओवरलोडिंग के खिलाफ चलाए गए अभियान को भी पलीता लगता हुआ प्रतीत होने लगा है। दूसरी ओर ओबरा सी परियोजना में मैटेरियल्स सप्लाई की आड़ में बालू और गिट्टी का सालों से ओवरलोडिंग परिवहन की भी जांच करायें जाने को लेकर आवाज उठने लगी है। बताते चलें कि पूर्व में स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यवाही भी की, लेकिन पुनः ओबरा सी तापीय परियोजना में बालू व गिट्टी का अवैध ओवरलोडिंग मैटैरियल्स सप्लाई का खेल बदस्तूर जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ओवरलोड वाहनों की वजह से नगर की सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं जिन पर चलना लोगों के लिए दूभर हो चुका है। बताया गया है कि जिला प्रशासन की पहल पर शारदा मंदिर चौराहे से लेकर विप चौराहे तक करोड़ों रुपए की लागत से बनाई गई सीसी रोड सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडराने लगा है।मजे की बात है कि परियोजना के अधिकारियों की मिली भगत से ओवरलोड का खेल जारी है जिस पर वह भी चुप्पी साध रखें हैं।

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सोनभद्र में ओवरलोडिंग का खेल किसके इशारे से हो रहा है इस पर जहां कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने से कतराता है वहीं सोनभद्र की सड़के बनते देर नहीं कि ओवरलोड के कारण गढ़ों में तब्दील होने को मजबूर हो रही हैं। एक तरफ सरकार बेहतर सड़कों का जाल बिछाने, बनाने में लगी हुई है तो दूसरी तरफ खननकर्ता छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के रास्ते सोनभद्र में प्रवेश कर ओवरलोडिंग बड़े वाहनों के जरिए इसे बर्बाद करने में लगी हुई हैं।

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