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घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और मनमानेपन का उदाहरण

किसी भी स्तर पर अनुसंधान में लापरवाही, पक्षपात अथवा विधि-विरुद्ध कार्रवाई स्वीकार नहीं

जहानाबाद। बगैर साक्ष्य व जख्म प्रतिवेदन के एक पीड़ित युवक को ही हत्या के प्रयास के मामले में जेल भेजने पर मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सर्किल इंस्पेक्टर रघुनाथ प्रसाद और केस के अनुसंधानकर्ता श्रीकांत कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही दोनों पर विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है। मामला नगर थाना कांड संख्या 336/25 से जुड़ा हुआ है। परस बिगहा थाना क्षेत्र के महमदपुर गांव निवासी रिशु राज को 24 फरवरी 2025 को विपक्षी अतुल आनंद ने मारपीट कर जख्मी कर दिया था। जहानाबाद में इलाज के बाद रिशु राज ने सदर थाने में आवेदन दिया, लेकिन प्राथमिकी नहीं हुई।इसके विपरीत विपक्षी अतुल आनंद के झूठे कोर्ट परिवाद के आधार पर रिशु राज को ही जेल भेज दिया गया। रिशु के अनुरोध आवेदन पर नौ जून 2026 को आईजी ने कांड की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान अनुसंधान और पर्यवेक्षण में कई गंभीर त्रुटियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि कोर्ट परिवाद के आवेदक अतुल आनंद को कांड की समीक्षा के दिन यानी नौ जून 2026 तक यह जानकारी नहीं थी कि उनके परिवाद पत्र पर नगर थाना में केस दर्ज किया गया है, जबकि अनुसंधानकर्ता ने केस डायरी में वादी और गवाहों के बयान भी अंकित कर दिए। यानी फर्जी तरीके से वादी व साक्षी का बयान अंकित कर लिया गया।पीड़ित रिशु राज का यह भी आरोप था कि आईओ ने उनसे तीस हजार रुपये मांगे थे, नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी थी। जांच में यह भी पाया गया कि बिना जख्म जांच प्रतिवेदन और ठोस साक्ष्य के धारा 109 बीएनएस में पीड़ित के विरुद्ध कांड को सत्य करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया तथा आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया गया।आईजी ने इसे घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और मनमानेपन का उदाहरण बताया। कार्रवाई के तहत नगर अंचल पुलिस निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद तथा नगर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक श्रीकांत कुमार सिन्हा को सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं, तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष दिवाकर विश्वकर्मा द्वारा रिशु राज की शिकायत पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर मामले की जांच का निर्देश पुलिस अधीक्षक अपराजित लोहान को दिया गया है। किस परिस्थिति में कांड दर्ज नहीं किया गया, दोषी होने पर कार्रवाई करने को कहा गया है। आईजी ने स्पष्ट किया कि अनुसंधान में लापरवाही, पक्षपात अथवा विधि-विरुद्ध कार्रवाई किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

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