
गर्मी में लू (तापघात) से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी
लक्षण, बचाव और प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – ग्रीष्मकालीन मौसम प्रारंभ होने पर तथा जिले में अधिक गर्मी को दृष्टिगत रखते हुए शुष्क वातावरण में लू (तापघात) की संभावना अधिक होती है। इन दिनों में अधिक समय तक बाहर धूप में रहने से व्यक्ति लू (तापघात) का शिकार हो सकते हैं। मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपेन्द्र सलामे ने जानकारी दी है कि आम लोग कुछ सरल उपाय अपनाकर लू (तापघात) से बचाव कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में बाहर जाते समय सफेद या हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, भोजन करके और पानी पीकर ही बाहर निकलें। गर्दन के पीछे का भाग, कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढंककर ही धूप में निकलें। छतरी और रंगीन चश्मे का उपयोग करें तथा अधिक मात्रा में पानी और पेय पदार्थों का सेवन करें। बाहर जाते समय अपने साथ पानी अवश्य रखें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें तथा उन्हें अनावश्यक रूप से धूप में बाहर न निकलने दें। उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें और सुपाच्य भोजन एवं तरल पदार्थ दें। साथ ही घर में तेज धूप को अंदर आने से रोकें, ठंडे मौसमी फलों का सेवन करें और जहां तक संभव हो, अधिक समय तक धूप में रहकर व्यायाम या मेहनत वाला कार्य न करें तथा नंगे पांव धूप में न चलें। इन सावधानियों को अपनाकर लू से बचा जा सकता है।
लू (तापघात) के लक्षणों के बारे में बताया गया कि इसके शिकार व्यक्ति को तेज सिरदर्द, मुंह और जुबान का सूखना, माथे, हाथ-पैर से पसीना आना, अत्यधिक प्यास लगना, शरीर में पानी की कमी, आंखों और पेशाब में जलन, त्वचा का लाल और सूखा होना, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, मतली या उल्टी, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
लू (तापघात) की स्थिति में प्राथमिक उपचार के तहत रोगी को तुरंत छायादार स्थान पर लिटाएं, उसके कपड़े ढीले करें और हवा दें। यदि रोगी बेहोश हो तो उसे कोई भी खाने-पीने की चीज न दें और तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। होश में होने पर उसे ठंडे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल या कच्चे आम का पना दें। शरीर का तापमान कम करने के लिए ठंडे पानी से स्नान कराएं या ठंडी पट्टियां रखें और यह प्रक्रिया ताप कम होने तक दोहराएं। फफोले होने पर स्टरलाइज ड्रेसिंग करें और चिकित्सकीय परामर्श लें। तेज नाड़ी या बेहोशी की स्थिति में तत्काल 108 एम्बुलेंस बुलाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं।
मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपेन्द्र सलामे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में लू (तापघात) से बचाव के लिए इन उपायों को अपनाएं, ताकि स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सके।