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सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डिंडोरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया प्रवेशोत्सव

डिण्डौरी आज दिनांक 01/04/26. दिन बुधवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डिंडोरी में प्रवेशोत्सव हार्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुख्यद्वार पर भैया/वहिनो को तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया।नवीन शैक्षिक सत्र का प्रारम्भ पूजन  हवन के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया जिसमें विद्यालय समिति के व्यवस्थापक नरेन्द्र सिंह राजपूत, कोषाध्यक्ष श्रीमती सपना जैन दीदी, संस्था प्रमुख देवेन्द्र नाथ चतुर्वेदी समस्त आचार्य परिवार और  भैया/ बहिन उपस्थित रहे। व्यवस्थापक नरेन्द्र सिंह राजपूत ने अपने उद्बोधन में सभी भैया बहिनों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सरस्वती शिशु मंदिर ही एक ऐसा विद्यालय है जहां अच्छी शिक्षा के साथ संस्कारक्षम्य वातावरण में शिक्षा दी जाती है।, यहां अध्ययन अध्यापन कार्य के पूर्व जो प्रार्थना होती है  भैया /बहिनों  का मन एकाग्र होता है।एवं उनका आध्यात्मिक विकास होता है अध्ययन अध्यापन कार्य के प्रति रूचि बढ़ती है। उन्होंने बताया कि सुबखार में अंग्रेजी माध्यम का कक्षा नर्सरी से कक्षा 5 th का विद्यालय खुल गया है। 30 अप्रैल के पूर्व प्रवेश कराने में 25% वार्षिक शुल्क में छूट दी जाएगी।कोषाध्यक्ष श्रीमती सपना जैन दीदी ने अपने उद्बोधन में सभी भैया बहिनों को कहा कि एक अच्छी शिक्षा के लिए सरस्वती शिशु मंदिर में ही अध्ययन अध्यापन कार्य करें और अपने जीवन में हमेशा अग्रसर रहें। विद्यालय के साथ अपने माता पिता और देश का नाम रोशन करें।संस्था प्रधान देवेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में सभी भैया बहिनों को   यह बात कहकर मार्गदर्शन प्रदान किया कि नवीन शैक्षिक सत्र में लगने वाली कक्षाओं में शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है, साथ ही एनसीईआरटी की पुस्तकें बोर्ड कक्षाओं के अतिरिक्त सभी कक्षाओं में लागू होंगी। मसान्त के पूर्व सभी भैया बहिनों की मासिक परीक्षा भी होगी। उन्होंने मंच के माध्यम से सभी भैया बहिनों को प्रतिदिन विद्यालय आने का महत्व बताते हुए नवीन शैक्षिक सत्र की शुभकामनाएं दीं। तत्पश्चात सभी आचार्य दीदियों के साथ उपस्थित भैया बहिनों ने यज्ञ करते हुए अपने नवीन शैक्षिक सत्र में अध्ययन अध्यापन कार्य का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ प्राचार्य देवेन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी द्वारा किया गया।

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