
जैविक संतरा उत्पादन से बदली किसान की तकदीर, 2000 संतरे के पौधों की जैविक खेती से मिल रही प्रतिवर्ष 15 लाख की आय
संतरे के साथ अन्य फसलों से भी हो रही लगभग 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई
#पांढुर्णा के ग्राम तिगांव के कृषक श्री नरेन्द्र ठाकरे ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाकर खेती को लाभकारी बनाने की मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, नवाचार और आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में जैविक खेती करते हुए न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।

श्री नरेन्द्र ठाकरे के पास लगभग 5.188 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। वे अपने खेत में संतरा, मक्का, तुअर, कपास, मिर्च और शिमला मिर्च जैसी फसलों की खेती करते हैं। इसके साथ ही उनके पास लगभग 35 पशु भी हैं, जिनसे उन्हें जैविक खेती के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त होते हैं। वे कई वर्षों से आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में जैविक खेती कर रहे हैं और अपनी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं करते।

अपने खेत में उन्होंने 30 से अधिक वर्गीपिट तैयार किए हैं, जिनसे बनने वाली वर्मीकम्पोस्ट खाद का उपयोग खेती में किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने एजोला के 4 टांके भी बनाए हैं, जिनका उपयोग पशुचारे के रूप में तथा उसके पानी का उपयोग वृद्धि उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है। पशुओं के लिए नेपियर घास का भी उत्पादन किया जाता है। कीट प्रबंधन के लिए वे गौमूत्र, नीम का काढ़ा, सड़ा हुआ छाछ और पत्तियों जैसे प्राकृतिक उपायों का उपयोग करते हैं।
श्री ठाकरे के खेत में लगभग 2000 संतरे के पौधे लगे हुए हैं, जिनसे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त मक्का, तुअर और सब्जियों की खेती से उन्हें लगभग 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है। संतरे की बेहतर गुणवत्ता, आकार, टेक्सचर और स्वाद के कारण व्यापारियों द्वारा संतरे सीधे उनके खेत से ही खरीद लिए जाते हैं, जिससे उन्हें मंडी तक ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। गुणवत्ता के कारण उन्हें बाजार में संतरे का लगभग 20 प्रतिशत अधिक मूल्य भी प्राप्त होता है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग न करने से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की बचत भी होती है।
वर्ष 2015-16 में आत्मा परियोजना के अंतर्गत संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत ग्राम तिगांव के 50 किसानों द्वारा एक एकड़ या उससे अधिक क्षेत्र में जैविक खेती करने के उद्देश्य से तिगांव जैविक समिति का गठन किया गया। यह समिति वर्तमान में उत्पादन के साथ-साथ जैविक संतरे के विपणन का कार्य भी कर रही है। योजना के अंतर्गत पैकिंग मटेरियल एवं पंजीयन प्राप्त होने से बाजार में इस समूह के जैविक संतरे की अच्छी पहचान बन गई है और आगामी वर्षों में इसके विपणन को और अधिक वृहद स्तर पर बढ़ाने की योजना है।
भविष्य में श्री नरेन्द्र ठाकरे का लक्ष्य जैविक संतरे से अपनी आय को दोगुना करने का है। इसके साथ ही उनका समूह जल्द ही कृषक कंपनी बनाकर जैविक संतरा जूस उत्पादन का कार्य शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिल सके और क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिल सके।